पाक ने की हाफिज पर फिर मेहरबानी

हाफिज के खिलाफ कार्यवाही एक साजिश का हिस्सा है इसकी सुगबुगाहट भारत को पहले ही मिल चुकी थी मगर अब आतंकियों की पनाहगाह बन चुके पाकिस्तान ने इसे खुद जल्द ही साबित भी कर दिया. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहिद खाकान अब्बासी ने मुंबई हमले के गुनहगार हाफिज सईद के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के बयान से मुकर गए है और इस दोगलेपन का कारण सईद के आतंकी संगठन जमात-उद-दावा और फलह-ए-इंसानियत फाउन्डेशन से पाक को खतरा होना बताया जा रहा है जिसके डर से पाकिस्तान सरगना की पनाह में फिर से चला गया है.

जमात-उद दावा (JuD) लश्कर-ए तैयबा का साथी समूह है जो मुंबई में 2008 में हुए आतंकवादी हमले के लिए जिम्मेदार है. उस हमले में 166 लोग मारे गए थे. अमेरिका ने जून 2014 में विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था. सूत्रों के अनुसार एक बैठक में अब्बासी ने कहा, 'दोनों संगठनों को प्रतिबंधित किया जाना चाहिए, लेकिन गृह मंत्री अहसन इकबाल की राय थी कि अगर अभी इन संगठनों को प्रतिबंधित किया गया तो सरकार को उसी तरह के संकट का सामना करना पड़ेगा, जैसा उसे नवंबर में करना पड़ा था.'

नवंबर में फैजाबाद में खादिम हुसैन रिजवी के नेतृत्व वाले इस्लामी संगठन तहरीक लब्बाइक या रसूल अल्लाह के समर्थकों के धरने की वजह से इस्लामाबाद और रावलपिंडी में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया था. हलाकि पाक के इस कदम के बाद सयुंक्त राष्ट्र उसके खिलाफ कड़ा कदम उठा सकता है.

पाक की छाया में सईद फिर "हाफ़िज़"

हाफिज सईद पाक की दोगली साजिश का हिस्सा

पाक का हाफिज के खिलाफ एक्शन कही साजिश तो नहीं

 

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