ईसाई दंपति को जिंदा जलाने वाले मौलवी को सजा-ए- मौत

लाहौर : अल्पसंख्यकों पर अत्याचार करने वाले एक मौलवी को पाकिस्तान के न्यायालय ने सजा देकर यहां रहने वाले अल्पसंख्यकों को कुछ राहत दी है। दरअसल यहां पर ईशनिंदा के आरोप में एक ईसाई दंपति को जीवित जला दिया गया था। ऐसे में करीब 5 लोगों को मौत की सजा सुनाई गई है। मौत की सजा पाने वालों में यह मौलवी भी शामिल है।

दरअसल लाहौर की आतंकरोधी अदालत के न्यायाधीश चौधरी मुहम्मद आजम द्वारा दोषी मौलवी को सजा दी गई। सजा के तौर पर इस मौलवी को और अन्य आरोपियों को मृत्यु दंड के ही साथ दो-दो लाख रूपए का जुर्माना देने के लिए कहा गया है। इस मामले में 8 लोग और दोषी ठहराए गए हैं। इन 8 लोगों को 2 वर्ष के कारावास की सजा दी गई है।

दरअसल वर्ष 2014 में कसूर जिले के कोट राधा किशन क्षेत्र में गर्भवती महिला को उसके पति के साथ ईंट भट्टे में जीवित जला दिया गया था। इस दंपति के तीन बच्चे थे। जिंदा जलाने के काम में मौलवी और उसके साथियों की मदद लोगों की भीड़ ने की थी। दरअसल इस महिला और उसके पति को उनके घर से खींचकर ईंट भट्टे में डाल दिया गया था। दोनों ही चीख-चीखकर खुद को निर्दोष बता रहे थे।

मगर इसके बाद भी किसी ने उनकी कोई बात नहीं मानी। घटना को लेकर जब पुलिस ने कार्रवाई की और जांच की तो ईंट भट्टे से दंपति की हड्डियां मिलीं। इस मामले में दोषियों को लेकर न्यायालय ने बुधवार को अपना निर्णय सुनाया तो पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचारों का विरोध करने वालों ने राहत की सांस ली।

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