राह भटके पाकिस्तानी बच्चे को फिर जगी वतन लौटने की आस

भोपाल : अक्सर भारत और पाकिस्तान के नागरिक एक दूसरे की सीमाओं में यहां - वहां घुस जाते हैं। ऐसे में इन नागरिकों को फिर से अपने देश लौटने में काफी समय लग जाता है। इनका परिवार इनके लौटने की आस लगाए रहता है। तो ये भी अपने परिवार से मिलने की कामना करते हैं। ऐसा ही एक मामला हाल ही में तब सामने आया जब भारत में दाखिल हुआ एक पंद्रह वर्षीय बालक को अपने वतन वापस लौटने की आस जगी। इस दौरान एक युवक हमजा बासित ने उसे उसके घर कराची वापस भेजने की पहल की। 

मिली जानकारी के अनुसार रमजान की मां रजिया बेगम से उसके पिता का तलाक हुआ। पिता मोहम्मद काजल उसे उसकी मां से अलग कर बांग्लादेश ले गया। जिसके बाद उसके पिता ने फिर से शादी कर ली। उसकी सौतेली मां और पिता के रूखे व्यवहार के चलते वह बांग्लादेश से भारत की ओर चला आया और फिर यहां रांची, मुंबई और दिल्ली में भटकता रहा। पांच वर्ष पूर्व भोपाल रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने इसे पकड़ लिया। 

october वर्ष 2013 में इसे बाल संप्रक्षण गृह भेजा गया। जब हमजा को उसके बारे में जानकारी लगी तो उसने उसे पाकिस्तान भेजने के लिए प्रयास किए। इस दौरान उसने फेसबुक और विभिन्न सोश्यल साईट्स की सहायता से कराची में कुछ लोगों से संपर्क किया। इसके बाद मूसा काॅलोनी की दीवारों पर उसके चित्र चस्पा किए गए।

इसके बाद जब उसके सौतेले पिता और उसकी मां ने उसकी फोटो देखी तो रमजान की मां ने पाकिस्तान से 18 सितंबर को भोपाल फोन लगाया। लगभग 5 वर्ष बाद मां की आवाज सुनकर उसे अपने कानों पर विश्वास ही नहीं हुआ। इसके बाद उसकी मां ने उसे कहा कि वह उसे पाकिस्तान बुलाएगी। फिलहाल यह बालक बाल गृह संगठन उम्मीद में अपने दिन गुजार रहा है। 

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