सिंधु जल संधि टूटने की संभावना से घबरा उठा पाकिस्तान

नई दिल्ली : भारत द्वारा उरी में आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तान को सिंधु जल संधी तोड़ने की धमकी क्या दी गई पाकिस्तान तो घबरा ही उठा। पाकिस्तान के मीडिया में इस बात को लेकर परेशानी जताई गई है। दरअसल जो 6 नदियां भारत से होकर पाकिस्तान जाती हैं उनमें से तीन का पूर्ण अधिकार भारत को दिया गया है जबकि तीन नदियों के पानी बिना किसी रोक के पाकिस्तान को दिए जाने की बात दर्शाई गई है लेकिन पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को बढ़ावा देने और भारत के खिलाफ युद्ध के हालात पैदा करने के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को तोड़ने की बात कही।

भारत की ओर से विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने कहा था कि भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति बन जाने पर इस संधि का मतलब नहीं रह जाता ऐसे में संधि को तोड़ दिया जाना अच्छा है। हालांकि यूएन के अधिकारी ने कहा कि पानी शांति का स्त्रोत होना चाहिए। इससे झगड़े या विवाद नहीं होना चाहिए। मगर भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया और अब पाकिस्तान घ्बरा रहा है।

यदि पाकिस्तान को इन नदियों रावी, व्यास और सतलज से पानी नहीं दिया जाता है तो पाकिस्तान में जल आपूर्ति तो प्रभावित हो ही सकती है बल्कि उसके इलेक्ट्रिसिटी प्रोडक्शन में भी कमी आने से इन्कार नहीं किया जा सकता है। गौरतलब है कि वर्ष 1960 में जो सिंधु जल संधि हुई थी उस पर पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अय्यूब खान और भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने हस्ताक्षर किए थे।

संधि में भारत से पाकिस्तान जाने वाली 6 नदियों के पानी के विभाजन की बात शामिल थी। जिसमें तीन पूर्वी नदियों में रावी, व्यास और सतलज का अधिकार भारत को दिया गया था। अन्य तीन नदियों झेलम, चिनाब सिंधु नदी के पानी के बहाव को बिना किसी रोक के पाकिस्तान को दिया जाना था। इस संधि के पहले 1948 में भारत ने पाकिस्तान की ओर जाने वाली नदियों का बहाव बंद कर दिया था ऐसे में इस बहाव को वापस चालू करना पड़ा था।

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