पाकिस्तान में बंदूकों पर भारी पड़ती तस्वीह और क़ुरान

Aug 28 2018 03:44 PM
पाकिस्तान में बंदूकों पर भारी पड़ती तस्वीह और क़ुरान

इस्लमाबाद: पाकिस्तान से एक नई खबर आ रही है, जहाँ इंटरनेशनल डॉन दाऊद इब्राहिम के बेटे के इस्लामी क्लर्क बनने के बाद अब कराची डॉन छोटा शकील के बेटा भी हाफ़िज़ बनने की राह पर चल पड़ा है.हफ़ीज़ वो होते हैं जो क़ुरान को ज्यादा करते हैं और उसे पढ़ते रहते हैं. जिया उल हक़ के 'पाकिस्तान से इमरान के नए पाकिस्तान' लेख में उन्होने लिखा है कि सैन्य संस्कृति से जुड़े लोग अब धर्म से जुड़ रहे हैं, यहाँ तक कि अब डॉन के परिवार के सदस्य भी लूट के साम्राज्य से बाहर निकलकर बन्दुक के स्थान पर तस्वीह का चुनाव कर रहे हैं.

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गौरतलब है कि पिछले सप्ताह ही इमरान खान सरकार ने संकेत दिए थे कि पवित्र कुरान विधेयक 2017 की अनिवार्य शिक्षा लागू कर सकती है ,यदि ऐसा होता है, तो कुरान को याद रखना और हाफिज बनना पाकिस्तान में नई सामाजिक मुद्रा बन सकता है, हालाँकि इस विधेयक पर अभी तक कानून नहीं बना है.

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पाकिस्तान के बाहरी देशों के रहवासियों को शायद लगता हो कि 1980 के दशक में ज़िया के शासन के समय से ही देश में ऐसा कानून लागू है, वर्तमान में अगर इस विधेयक को लागू किया जाता है तो पाकिस्तान में नई सामाजिक चिंता पैदा हो सकती है. 2017 के विधेयक के अनुसार पहली से पांचवी तक के छात्रों को अरबी में क़ुरान पढ़ना अनिवार्य होगा, जबकि छटवीं के बाद क़ुरान को अनुवाद के साथ पढ़ा जाना अनिवार्य होगा. जबकि जिया के समय में विद्यार्थिओं को पूरी क़ुरान याद रखने पर 20 अतिरिक्त अंक दिए जाते थे और जो अतिरिक्त अंक नहीं लेना चाहते थे, उनके लिए भी क़ुरान के छंदों को याद करना जरुरी था, मतलब उस समय सभी छात्रों को क़ुरान पढ़ना अनिवार्य था. 
इन कानूनों से पाकिस्तान के अल्पसंख्यकों को भी समस्या हो सकती है. 

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