बबाल : चिदंबरम ने अफजल की फांसी को बताया गलत

Feb 25 2016 12:07 PM
बबाल : चिदंबरम ने अफजल की फांसी को बताया गलत

नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्व विद्यालय (JNU) का मामला ठंडा होने का नाम ही नहीं ले रहा है. मामले में अफजल गुरु के समर्थन और देश विरोधी नारे लगाने के आरोप में 3 छात्रों को गिरफ्तार किया जा चुका है इस मुद्दे पर संसद में भी बुधवार को जमकर हंगामा हुआ. इस बीच कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने एक विवदित बयान दिया है.

एक इंटरव्‍यू में चिदंबरम ने कहा 'मुझे लगता है अफजल की फांसी पर फैसला ठीक से नहीं लिया गया. संसद पर हमले में उसकी भूमिका पर संशय है.' आप को बता दें कि संसद हमले के आरोपी अफजल को UPA के कार्यकाल में 3 साल पहले फांसी दे दी गई थी.

चिदंबरम से पूछा गया कि क्या अफजल गुरु को फांसी देने के लिए कोर्ट सही निष्‍कर्ष पर पहुंची थी? इस पर चिदंबरम ने कहा कि 'मुझे लगता है यह संभव था कि इस मामले पर एक इमानदार राय रखी जाती कि अफजल पर फैसला ठीक ढंग से नहीं किया गया और संसद पर हमले में उसकी भूमिका को लेकर गहरा संशय है. उन्होंने आगे कहा कि 'सरकार में होने के चलते आप ऐसा नहीं कह सकते कि अदालत ने केस को लेकर गलत निर्णय लिया क्योंकि वो सरकार ही थी जिसने उसके खिलाफ केस लड़ा था. लेकिन, एक स्वतंत्र व्यक्ति इस पर अपनी राय दे सकता है. और ऐसे में उसे देश विरोधी कहना गलत है.

गौरतलब है कि 2008 से लेकर 2012 तक पी चिदंबरम गृह मंत्री थे और 2013 में अफजल को फांसी दी गई थी उस समय सुशील कुमार शिंदे गृह मंत्री थे.

चिदंबरम ने कहा कि 'स्वतन्त्रता से बोलना देशद्रोह नहीं है. आपकी बातें तभी देशद्रोही होती हैं जब इनसे बारूद के ढेर में आग लग जाए.' उन्होंने कहा कि 'JNU में लगाए गए नारे देशद्रोह नहीं थे. इस उम्र में छात्रों को गलत होने का हक होता है और विश्व विद्यालय ऐसी जगह है जहां आप हमेशा गंभीर नहीं हो सकते कई बार आप हास्‍यास्‍पद भी हो जाते हो.

जब चिदंबरम कहा गया कि अफजल की फांसी के समय आप की सरकार थी तो उन्‍होंने कहा, 'लेकिन उस समय गृह मंत्री नहीं थे, 'मैं नहीं कह सकता कि मैं उस समय क्‍या करता. निर्णय लेना तभी संभव है जब आप कुर्सी पर बैठे हों.