हमारे आंकड़ों की वैश्विक विश्वसनीयता नहीं हैः हामिद अंसारी

पटना : उपराष्ट्रपति मोहम्मद अंसारी ने कहा है कि वैश्विक स्तर पर भारतीय आंकड़ो की विश्वसनीयता कम हुई है। देश के सामाजिक आंकड़ो की हालत ठीक नहीं है। तमाम नीतियों के बावजूद आंकड़ों के मामले में समस्याएं बनी हुई है। बेहतर नीति के निर्माण के लिए गुणवता पूर्ण आंकड़ों की जरुरत बताते हुए अंसारी ने कहा कि सरकारी आंकड़ों और इसकी खामियों को दूर करने करने की जरुरत है।

शुक्रवार को पटना में सोशल स्टैटिक्स इन इंडिया विषय पर एशियन डेवलपमेंट रिसर्च इंस्टीट्यूट (आद्री) के रजत जयंती समारोह में बोलेत हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत जैसे विकासशील देश को नीतियों के निर्माण से पहले यहां की आबादी की सामाजिक व आर्थिक जानकारी जुटाने की जरुरत है। लेकिन आज भी यह एक चुनौती है।

17वीं सदी के अंतिम और 18वीं सदी की शुरुआत में यूरोप में सांख्यिकी को राजनीतिक अंकगणित कहने का अधिक प्रचलन था। पहले विश्लेषकों का मानना था कि बढ़ती हुई आबादी मजबूत देश का प्रमाण है। समय के साथ-साथ सांख्यिकी का विकास हुआ। सांख्यिकी से दो लाभ मिलते हैं, एक तो समाज की सटीक और वास्तविक जानकारी मिलती है और दूसरा यह कि सामाजिक समस्याओं के पैदा होने पर इसका उपयोग किया जा सकता है।

सांख्यिकी हमें तथ्यों के खोज और उसे समझने में मदद करता है। अंसारी ने कहा कि 15वीं जनगणना में 2.7 मिलियन अधिकारियों को नियुक्त किया गया। 2005 में रंगराजन कमेटी की सिफारिशों पर राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग बनाया गया था। सांख्यिकी मंत्रालय ने 2009 में नयी आंकड़ा नीति और 2012 में राष्ट्रीय आंकड़ा उपलब्धता नीति जारी की थी।

लेकिन आंकड़ों की गुणवत्ता हम सुनिश्चित नहीं कर पाए। इस संगोष्ठी को मुख्मंत्री नीतीश कुमार और राज्यपाल रामनाथ कोविंग ने भी संबोधित किया।

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