ई-सिगरेट से हो सकता है कैंसर, अध्यादेश लाने की तैयारी में भारत सरकार

 

ई-सिगरेट पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या बनते जा रही है. वहीं भारतीय युवा भी इससे बच नहीं पा रहे हैं और कम उम्र में ही युवा तेजी के साथ इसकी ओर आकर्षित हो रहे हैं. भारत सरकार ई-सिगरेट समेत इलेक्ट्रॉनिक निकोटिन डिलीवरी सिस्टम्स (ईएनडीएस) उत्पादों के निर्माण, बिक्री और आयात पर पाबंदी लगाने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी में हैं. साथ ही विशेषज्ञों की माने तो सरकार का अध्यादेश स्वागत के योग्य है, हालांकि विशेषज्ञ यह चाहते हैं कि इस पर पूरी तरह से ही प्रतिबंध लगा दिया जाए तो यह और भी बेहतर होगा. 

ई-सिगरेट ही नहीं धूम्रपान के अन्य वैकल्पिक उपकरणों जैसे हीट-नॉट-बर्न डिवाइस, वेप और ई-निकोटिन स्वाद वाले हुक्कों पर भी पाबंदी लगाना सरकार के एजेंडे में शामिल हैं. ई-सिगरेट एक बड़ी समस्या बनती जा रही है और अब इससे किसी भी वर्ग के लोग वंचित नहीं हैं, हर कोई इससे भलीभांति परिचित है. लेकिन इसका साथ छोड़ना ही सबसे बेहतर है. क्योंकि यह हमारी जान के साथ खेलने के लिए काफी है और इससे कैंसर होने का खतरा भी है.

इस पर रोक लगाना या इसको बढ़ावा ना देना जरूर सरकार की प्राथमिकताओं में से एक है, हालांकि हमे खुद भी व्यक्तिगत स्तर पर इसके नुकसान को देखकर इसका बहिष्कार करना चाहिए. साथ ही खबर है कि सरकार इस बड़े मुद्दे के लिए कानूनी राय भी ले रही है. यदि अध्यादेश लेकर अगले सत्र में इसका बिल पास होता है, तो फिर यह सरकार के लिए एक और बड़ी जीत होगी. इसके लिए मंत्रालय, सरकार सभी अपने-अपने स्तर पर प्रयासरत हैं. साथ ही इस तरह भी यह स्वास्थ्य मंत्रालय के लिए भी यह एक बड़ी बाधा या बड़ा मुदा है कि इसके उपयोग से कैंसर का ख़तरा पैदा होता है. अतः ई-सिगरेट पर प्रतिबंध लगाने से कई तरह के लाभ नागरिकों और सरकार को मिलेंगे. 

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