होम डिलीवरी फ़ूड से हर महीने बनता है 22,000 टन कचरा

इन दिनों तो सडकों पर लोगों से ज्यादा ऑनलाइन फ़ूड डिलीवरी वाले लुक नजर आते हैं. वीकेंड पर तो लोग अक्सर ही बाहर से खाना मंगवाकर खाते हैं. कुछ लोग तो रोजाना ही होटल का खाना पसंद करते हैं. जब भी होटल से खाना आता है तो वो प्लास्टिक बॉक्स में ही आता है और लोग बिना ये जाने कि 'प्लास्टिक के बर्तन में रखा खाना उनके लिए कितना ज्यादा हानिकारक हो सकता है' बड़े मजे से उसका स्वाद लेकर खाते हैं. अगर आप भी प्लास्टिक के बर्तनों में रखा खाना खाते है तो सावधान हो जाए...

आज के समय में तो ज्यादातर होटल वाले प्लास्टिक के ही बर्तनों का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन आपको ये जानकर हैरानी होगी कि इतने सारे प्लास्टिक से बड़ी संख्या में कचरा बनता है. जी हां.... रिपोर्ट्स की माने तो हर महीने इससे 22,000 टन कचरा बनता है. प्लास्टिक से बनी कटोरी या चम्मच को आप ज्यादा समय तक इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं और ना ही इसमें ज्यादा देर तक खाना रखना चाहिए. प्लास्टिक से बने बर्तनों का सबसे ज्यादा इस्तेमाल फ़ूड ऐप के बिजनेस में किया जा रहा है. अब तक तो बड़ी संख्या में फ़ूड प्लास्टिक के बर्तनों में ही डिलीवर हो रहा हैं और लोग इसे अपना भी रहे हैं लेकिन इससे लोगों की सेहत को काफी ज्यादा नुकसान होता है.

प्लास्टिक के बर्तनों को लेकर कई जगह इसका विरोध भी हो चुका है इसलिए अब फ़ूड कंपनियां इसका विकल्प खोज रही हैं. सूत्रों की माने तो इन कंपनियों द्वारा अब एक-फ्रेंडली फ़ूड ट्रे का इस्तेमाल किया जाएगा. इससे लोगों की सेहत को भी नुकसान नहीं होगा और प्लास्टिक से पर्यावरण भी दूषित नहीं होगा. माना जा रहा हैं कि फ़ूड डिलीवरी कंपनी के पास हर महीने करीब 3-4 करोड़ ऑर्डर आते हैं और अगर इतने आर्डर में प्लास्टिक का खाना भेजा जाए तो इससे महीने भर का 22,000 टन कचरा बनता है. तमिलनाडु में तो कुछ ऐसे भी होटल्स हैं जो ऐसे लोगों को डिस्काउंट दे रहे हैं जो प्लास्टिक के बर्तनों में खाना नहीं मंगवाते और परसाल के बाद भी अपने घर के बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं.

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