नवरात्री के पहले दिन इस तरीके से करे माँ शैलपुत्री की पूजा

आज 21 सितम्बर शारदीय नवरात्र का पहला दिन है,नवरात्र के दिनों में माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है. जिसमे पहला दिन माँ शैलपुत्री का होता है.मार्कण्डेय पुराण में बताया गया है की माँ का नाम शैलपुत्री इसलिए पड़ा क्योकि उनका जन्म हिमालय के यहां हुआ था.हिमालय हमारी शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक माना जाता है, मां शैलपुत्री की पूजा करने से अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. आज हम आपको नवरात्र के पहले दिन पर माँ शैलपुत्री की पूजा करने की विधि के बारे में बताने जा रहे है.

आइये जानते है क्या है इनकी पूजन विधि

माँ शैलपुत्री की पूजा करने के लिए सबसे पहले एक लकड़ी की चौकी पर माँ शैलपुत्री की तस्वीर को स्थापित करे. अब  गंगा जल या गोमूत्र से माँ की तस्वीर को शुद्ध कर  ले. अब उनके सामने एक चौकी पर थोड़े से चावल रखकर चांदी, तांबे या मिट्टी के घड़े में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापना करें. अब इसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका, सप्त घृत मातृका (सात सिंदूर की बिंदी लगाएं) की स्थापना भी करें. अब इनके सामने बैठकर व्रत, पूजन का संकल्प लें अब आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि से माँ की पूजा करे,इसके बाद प्रसाद बांटे .

ध्यान मंत्र

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्राद्र्वकृतशेखराम्.
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम

 

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