'ओमीक्रॉन वेरिएंट' को लेकर आई एक और बड़ी खबर, एक्सपर्ट्स ने कही ये बड़ी बात

नई दिल्ली: कोरोना संक्रमण के नए ओमीक्रॉन वेरिएंट को लेकर आए दिन नए नए रिसर्च सामने आ रहे हैं। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) की तरफ से यह दावा किया गया है कि सिर्फ 12-24 घंटे के अंदर ओमीक्रॉन का हमारी बॉडी में इन्क्यूबेशन हो रहा है। IMA के सेकेट्री फिनांनस डॉ अनिल गोयल ने बताया कि ओमीक्रॉन के फैलाव को लेकर जो रिपोर्ट आ रही हैं, वह हैरान कर देने वाली हैं। उन्होंने कहा कि ये संक्रमण चिकन पॉक्स की भांति तेजी से हमारी बॉडी में इन्क्यूबेट कर रहा है। डॉ अनिल गोयल ने कहा कि डेल्टा वेरिएंट (Delta Variant) में इनक्यूबेशन पीरियड 3 से 7 दिनों का माना जाता था। उसके पूर्व जो वेरिएंट था उसमें 14 दिनों का इनक्यूबेशन पीरियड माना जाता था, चाहे वह अल्फा बीटा या गामा हो। अभी जो ओमीक्रॉन के मामले आ रहे है, उसमें ऐसा कहा जा रहा है कि इसका इनक्यूबेशन पीरियड सिर्फ 12 से 24 घंटे का है। इसका अर्थ यह हुआ कि एक रोगी से दूसरे रोगी में सिर्फ 12 से 14 घंटे में इंफेक्शन फैला सकता है तथा क्लिनिकल लक्षण उत्पन्न कर सकता है।

चिकनपॉक्स की तरह तेजी से इन्क्यूबेशन;-
डॉ अनिल गोयल ने कहा कि दक्षिण अफ्रीका तथा बोत्सवाना से जिस तरीके से वेरिएंट के मामले आए यह कई देशों के लिए उदाहरण बना। इसके साथ-साथ एक और चीज पाई गई है कि इस मामले में चिकनपॉक्स की भांति यह बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। जिस तरीके से चिकन पॉक्स में संक्रमण होता है उसी गति से ओमीक्रॉन में भी वायरस पाया गया।

माइल्ड से मॉडरेट होने का संकट:-
डॉ अनिल गोयल ने कहा कि इसमें एक समझने वाली बात यह है कि जिस हिसाब से यह जिस तेजी से फैल रहा है यदि पिछली बार की तुलना करें कि 1 दिन में चार लाख के साथ गए थे। अगर वैसे हालात आते है तो 1 दिन में एक लाख मामले भी आते हैं तथा यदि हमें आईसीयू की आवश्यकता पड़ी तो हमारे लिए कठिनाई हो सकती है। इसी बात को हमें ध्यान में रखना पड़ेगा हमारे पब्लिक हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर पर बहुत प्रेशर आ जाएगा। इसलिए अभी हमको अलर्ट हो जाना है।

बूस्टर डोज है आवश्यक:-
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने इस बात की मांग की है कि इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड जो भी व्यक्ति हैं उन्हें एडिशनल डोज शीघ्र से शीघ्र लगना चाहिए। विशेष तौर पर वह लोग जिनमें पहले से दिल से संबंधित कोई बीमारी है तथा दूसरी कई सारी बीमारियां हैं उनको एडिशनल डोज लगना ही चाहिए। इसके अतिरिक्त हेल्थ केयर वर्कर को भी बूस्टर डोज लगनी चाहिए।

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