98 साल बाद मिली शहीद को वतन की माटी

चंडीगढ़ : समय के आगे सब नतमस्तक हैं. पूरा काल चक्र उसी पर निर्भर है, तभी तो प्रथम विश्व युद्ध के दौरान फिलिस्तीन में शहीद हुए भारतीय सैनिक रिसालदार बदलुराम को 98 साल बाद देश की मिट्टी नसीब हो पाई.शायद समय को यही मंजूर था. इसमें माध्यम बने कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनकड़ जो पवित्र कलश को लेकर आए. हुआ यूँ कि पिछले दिनों जलवायु परिवर्तन में टिकाऊ खेती व जल प्रबन्धन पर मिस्त्र में आयोजित अंतर राष्ट्रीय सेमिनार में भाग लेने के लिए कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनकड़ प्रतिनिधि मंडल के साथ वहां गये थे.

इस दौरान उन्हें प्रथम विश्व युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों के युद्ध स्मारक पर जाने का मौका मिला. जिसमें हरियाणा के रिसालदार बदलूराम का भी नाम शामिल था. यह उल्लेख प्रासंगिक है कि रिसालदार 23 सितम्बर 1918 को ब्रिटिश इंडियन आर्मी की अगुवाई कर रहे थे. दुश्मन सेना से साहस के साथ लड़ते हुए उन्होंने टुकड़ी की रक्षा की थी और वीर गति को प्राप्त हो गये थे. उनके इस योगदान के लिए ब्रिटिश हुकुमत ने उन्हें सर्वोच्च विक्योरिया क्रास का सम्मान मिला था. वे पहले भारतीय थे जिन्हें यह सम्मान मिला था.

इस युद्ध के शहीदों की याद में जार्डन नदी के किनारे एक स्मारक बनाया गया था. एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में मंत्री धनकड़ ने बताया एक बहादुर सैनिक की याद को जन्म भूमि पर लाने के क्षणों को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. इस मौके पर वे खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं. शहीदों का सर्वोच्च बलिदान कभी जाया नहीं जाता. उनकी शहादत पर कभी न कभी वतन की मिट्टी जरुर नसीब होती है. अभी जहाँ पडपोते पंकज धनखड़ का स्मारक है वहीँ दादा बदलुराम का भी स्मारक बनेगा. बाद में उनकी पवित्र मिटटी पैतृक गाँव ढाकला पहुँच गई

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