अगर 'पैगम्बर' का अनादर करना ईशनिंदा, तो 'महादेव' का अपमान करना कैसे जायज़ ?

अगर 'पैगम्बर' का अनादर करना ईशनिंदा, तो 'महादेव' का अपमान करना कैसे जायज़ ?
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नई दिल्ली: भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से निलंबित किए जाने के बाद रविवार (5 जून 2022) को दिल्ली भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा और नवीन जिंदल ने अपने बयानों पर माँफी माँग ली है। नूपुर शर्मा ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से महादेव भगवान शिव को लेकर अपमानजनक टिपण्णी की जा रही थी और इस वजह से गुस्से में आकर उनके मुँह से कुछ गलत निकल गया, तो वो अपने शब्द वापिस लेती हैं।

 

नूपुर शर्मा ने एक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि, 'मैं पिछले कई दिनों से टीवी डिबेट पर जा रही थी, जहाँ मेरे आराध्य शिव जी का लगातार अपमान किया जा रहा था। मेरे सामने यह कहा जा रहा था कि वो शिवलिंग नहीं फव्वारा है और दिल्ली के हर फुटपाथ पर ऐसे शिवलिंग पाए जाते हैं। जाओ जा के पूजा करके आओ। मेरे सामने बार-बार इस तरह से शिव जी के अपमान को मैं बर्दाश्त नहीं कर पाई और रोष में आकर मैंने कुछ कह दिया। अगर मेरे शब्दों से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची है तो मैं अपने शब्दों को वापिस लेती हूँ। मेरी मंशा किसी को भी कष्ट पहुँचाने की कभी नहीं रही।' रिपोर्ट के अनुसार, पार्टी से निकाले जाने के बाद भाजपा के पूर्व नेता नवीन जिंदल का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कभी नहीं था। इसके साथ ही जिंदल ने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से उनका पता सार्वजनिक नहीं करने का आग्रह किया है। उन्होंने दावा किया है कि उन्हें निरंतर हत्या की धमकियाँ मिल रही हैं। नविन जिंदल ने दिल्ली के पुलिस कमिश्नर और उपराज्यपाल से संज्ञान लेने का आग्रह किया है।

इस पूरे घटनाक्रम में ध्यान देने वाली बात यह है कि, जब से ज्ञानवापी मामला सुर्ख़ियों में आया है और वहां सर्वे के दौरान शिवलिंग मिलने का दावा किया गया है। उसके बाद से ही सोशल मीडिया पर हिन्दुओं के आराध्य देव शिव का मज़ाक बनाया जा रहा है और ये कोई नई बात नहीं है। अरफ़ा खानम शेरवानी से लेकर राणा आयूब तक हिन्दू देवी देवताओं को लेकर अपमानजनक पोस्ट कर चुके हैं।

ये पूर्णतः सत्य है कि, भारत जैसे धर्मनिरपेक्ष और लोकतान्त्रिक देश में किसी को भी किसी दूसरे के धर्म का अपमान करने की छूट नहीं है, लेकिन यही बात उन पर भी लागू होती है, जो कभी सड़क के किनारे लगने वाले पिलर्स को शिवलिंग बताकर उसका मज़ाक उड़ाते हैं, तो कभी दूसरे देवी-देवताओं पर अपमानजनक पोस्ट करते हैं। कहने का तात्पर्य केवल इतना है कि, जो सम्मान, पैगम्बर मोहम्मद का है, वही जीसस का भी है, वही महादेव का और वही गुरु नानक का है। इसीलिए अगर आप किसी पर कीचड उछालोगे तो सामने वाला भी ऐसा कुछ कर सकता है, लिहाजा सभी को अपनी मर्यादाओं का पालन करना चाहिए।   
  

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