नई खोज अब वैज्ञानिक हलके पदार्थ को मजबूत बना सकते है

वाशिंगटन : ऐसी कोई चीज़ की अगर हम बात करे जो हल्की हो लेकिन उसकी कठोरता उससे कई गुना ज्यादा तो क्या आपके लिए ऐसी कोई चीज़ फायदेमंद  होगी की नहीं ? 
मेरा यह मनना है कि हाँ क्योकि कम वजन के साथ साथ उसकी कठोरता से हम अपने रोजमर्रा के कामो को करने में आसानी रहेगी. ऐसा भी कहा सकते के वो एक बेहतर इंस्ट्रूमेंट कि तरह कार्य करेगा. प्राप्त सूत्रों के अनुसार पता चला है कि  हमारे वेज्ञानिको ने लकड़ी और हड्डी से मिलते जुलते संरचना वाले बेहद मजबूत पदार्थ को बना लिया है . वेज्ञानिको ने  3d प्रिंटिंग तकनीक के सहायता से धुंद बनायीं है , अब इस धुंद को चांदी कि बूंदो से तैयार करके इसे खास तकनीको की मदद से नए पदार्थ में विकसित किया गया है.

वेसे आप सोच रहे होंगे की किसी चीज़ को करने के लिए प्रेरणा की तो जरुरत तो पड़ती है ना तो इसको बनाने की प्रेरणा प्रकृति से मिलती है,
कुछ अफ़्रीकी रेगिस्तानों में यह प्रक्रिया कभी कभी देखने को मिलती है , यहाँ पर गंधक युक्त धुंद वाष्पीकृत होकर डेजर्ट रोज के क्रिस्टलो का निर्माण करती है, ये जो क्रिस्टल रोज होती है दरसल यह पत्थरो के ऊपर बानी चपटी गोलाकार पत्तियो जैसी आकृति होती है . वेसे ये गुलाब की पंखुडियो की तरह दिखाई देती है इसलिए इसको डेजर्ट रोज भी कहा जाता है. इस शोध के चलते एक प्रोफ़ेसर जिनका नाम राहुल पानत ने कहा कि पदार्थो में 3 डी स्थापत्य तकनीक के इस्तेमाल  के हिसाब से बहुत ही बड़ी उपलब्धि है . इसके द्वारा हम कम वजन वाले काफी मजबूत चीज़े बना सकते है जिसके मदद से हम मानव जीवन में काफी समस्याओ का भी सलूशन भी कर सकते है. " the  इंडिपेडेंट" की खबर के मुताबिक  रिसर्च टीम ने अपनी इस तकनीक को पेटेंट हासिल करने के लिए आवेदन कर दिया है. इस शोध के नतीजो या रिजल्ट  को साइंस अड्वान्सेज़ में प्रकाशित किये गए है. 

चांदी के साथ ही परीक्षण क्यों किया , क्यों की रिसर्च टीम ने इस शोध में चांदी का इस्तेमाल इसलिए किया क्योकि चांदी के सिवाय किसी और पदार्थो का प्रयोग नहीं किया जा सकता है , प्रोफ़ेसर पनात के मने तो ऐसा कोई भी पटार्थ जिसे बेहद सूक्षम कणो में तोडा जा सकता है, उस पर यह तकनीक सफलतापूर्वक इस्तेमाल की जा सकती है, इस तकनीक  का उपयोग करके जो भी आकृति तैयार होंगी वो आकृति काफी मजबूत होगी. इस तकनीक को उपयोग में लेकर बेहद मजबूत और छोटे पुल और इलेक्ट्रानिक कनेक्शन्स भी बनाये जा सकते है, और अगर मानव जीवन की मने तो कुछ ऐसे इक्यूपमेंट  भी बन सकते है जो शास्त्र या फिर औजार के रूप में हो है.

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