भारत में Omicron का एक भी केस नहीं, जानिए WHO ने इसे क्यों बताया 'वैर‍िएंट ऑफ़ कंसर्न'

नई दिल्ली: विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने सार्स-कोव-2 की वंशावली के नये वैरिएंट बी.1.1.1.529, जिसके संबंध में माना जाता है कि यह दक्षिणी अफ्रीका में उभरा है. इसको Omicron नामक वायरस के चिंतित कर देने वाले एक प्रकार (वीओसी) के तौर पर नामित किया गया है. इस फैसले ने वैश्विक स्तर पर महामारी प्रबंधन में प्राथमिकताओं में व्यापक परिवर्तन की शुरुआत कर दी है.

WHO ने अन्य बातों के अलावा, मॉनिटरिंग बढ़ाने की सिफारिश की है, विशेष रूप से वायरस जीनोम अनुक्रमण, इस संस्करण से पैदा खतरों को समझने के लिए केंद्रित अनुसंधान और शमन उपायों को तेज करना, जैसे अनिवार्य रूप से मास्क लगाना शामिल हैं. ब्रिटेन और कई अन्य देशों में अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पहले से ही अधिक बंदिशें लागू हो चुकी हैं. दरअसल, जापान ने सभी विदेशी पर्यटकों के लिए अपने दरवाजे बंद कर दिए हैं. वायरस के इस संस्करण को VOC घोषित करने में जो तेजी दिखाई गई है, वह चौंकाने वाली है. बोत्सवाना और दक्षिण अफ्रीका में इस वायरस के पहले ज्ञात संक्रमण के बाद से दो हफ़्तों से थोड़ा ज्यादा समय ही बीता है.

इसकी तुलना डेल्टा संस्करण से करें जो वर्तमान में यूरोप और विश्व के कई अन्य हिस्सों में एक्टिव है. इस संस्करण का पहला केस भारत में अक्टूबर 2020 में दर्ज किया गया था, मगर देश में (साथ ही अन्य कई देशों में) मामलों में जबरदस्त उछाल के बाद भी, इसे वीओसी का दर्जा मिलने में कम से कम छह महीने का वक़्त लगा था. बता दें कि संसद के उच्च सदन में बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने कहा कि भारत में अब तक कोरोना के Omicron वेरिएंट का कोई केस सामने नहीं आया है. 

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