No Smoking Day : 250 साल पुराना है 'मौत' का इतिहास, एक मिनट में बनती हैं 9 हजार सिगरेट

Mar 13 2019 09:13 AM
No Smoking Day : 250 साल पुराना है 'मौत' का इतिहास, एक मिनट में बनती हैं 9 हजार सिगरेट

दुनियाभर में हर वर्ष मार्च माह के दूसरे बुधवार को नो स्मोकिंग डे मनाया जाता है. इस बार मार्च का दूसरा बुधवार आज यानी कि नो स्मोकिंग डे आज मनाया जा रहा है. नो स्मोकिंग डे पर आज बात होगी सिगरेट के बारे में. बताया जाता है कि सिगरेट बनाने की मशीन का विकास 1750 से 1800 ईस्वी के बीच हुआ था. पहली मशीन एक मिनट में 200 सिगरेट का निर्माण करती थी. लेकिन आज के समय की मशीन एक मिनट में 9000 सिगरेट बना देती है. बता दें कि 2003 में भारत सरकार ने एक अधिनियम पारित किया था, जिसके तहत सिगरेट को ध्यान में रखते हुए कई बातें कहीं गई थी. तो आईए जानते है आज इस अवसर पर क्या है भारत सरकार के अधिनियम  में खास....

-कोई भी व्यक्ति सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान नहीं कर सकता है. इनमें सभागृह, भवनों, रेलवे स्टेशन, पुस्तकालय, अस्पताल, रेस्तराँ, कोर्ट, स्कूल, कॉलेज आदि शामिल हैं. 
-सार्वजनिक स्थलों पर भारतीय भाषाओं में बड़े-बड़े अक्षरों में गैर-धूम्रपान क्षेत्र के बोर्ड लगाना अनिवार्य किया गया था. 
-अधिनियम के तहत कहा गया था कि सिगरेट और तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन नहीं होगा. 
-भारत में 30 कमरों के होटल या तीस से अधिक लोगों के बैठने की रेस्तराँ में मालिक या मैनेजर को यह तय करना होगा कि धूम्रपान व गैर-धूम्रपान क्षेत्र अलग हों और लोगों को गैर-धूम्रपान क्षेत्र में जाने के लिए धूम्रपान वाले इलाके से न होकर जाना पड़ें. 
-तंबाकू और उसके अन्य तंबाकू उत्पाद जैसे कि गुटखा, खैनी, जर्दा, तंबाकू वाले मसाले, बीड़ी, सिगरेट, हुक्का, चुरट, सिगार, नसवार 18 साल से कम के लोगों के लिए पूर्णतः प्रतिबंधित है.

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