सामूहिक सुहागरात जैसा कोई कार्यक्रम नहीं

Feb 24 2015 06:18 AM
सामूहिक सुहागरात जैसा कोई कार्यक्रम नहीं
भारत देश एक संस्कृति प्रधान देश है, यहाँ सस्कृति को सबसे ऊपर रखा जाता है. और हमारी संस्कृति में शादी का एक अपना अलग ही महत्व है. यहाँ पर कई बार शादियां सामूहिक रूप से की जाती है. जी हाँ सामूहिक शादियों में कई युवक युवतियों की शादियां एक ही जगह एक ही साथ की जाती है. जल्द ही में आयुष्मान खुराना अभिनीत की एक फिल्म "दम लगाके हईशाह" भी आने भी आने वाली है जिसमे सामूहिक विवाह का ही आयोजन किया जाता है. 
 
इस बारे में आयुष्मान खुराना का कहना है कि सामूहिक विवाह में ऐसा लगता है जैसे सभी दूल्हों को एक जगह खड़ा कर दिया हो और ये पता ही नहीं चल रहा है कि इनमे से कौन किसका दूल्हा है या कौन किसकी दुल्हन है, क्योकि सबके चेहरे तो सेहरे से ढंके हुए है. साथ ही आयुष्मान यह भी कहते है कि अच्छा है कि यहाँ सामूहिक सुहागरात जैसा कोई नया कार्यक्रम नहीं होता है. आइये देखते है इसी तर्ज पर बना एक गाना. 


?