मीट बैन पर सरकार का तर्क, मछली का पानी से बाहर निकालना उसका वध नहीं माना जाता

Sep 12 2015 12:47 PM
मीट बैन पर सरकार का तर्क, मछली का पानी से बाहर निकालना उसका वध नहीं माना जाता

मुंबई : बॉम्बे हाई कोर्ट ने मीट बैन के खिलाफ दायर अर्जी पर फैसला सुनाते हुए यह आदेश दिया है की 13 और 18 सितंबर को मीट की बिक्री पर रोक नहीं रहेगी. यानि मुंबई में मीट बैन दो दिन कम कर दिया गया है. आपको बता दे की जैन समुदाय के पर्युषण पर्व को लेकर मीट पर चार दिन का बैन लगा दिया गया था जिसके खिलाफ कारोबारियों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था. अदालत ने कहा की अगर इस समय अगर अहिंसा की बात की जाती है तो मछली,सीफूड और अंडे पर बैन क्यों नहीं लगाया गया. महाराष्ट्र सरकार ने अदालत की इस बात का बड़ा ही अजीब तर्क देते हुए कहा की दोनों में काफी फर्क है सरकारी वकील अनिल सिंह ने कहा की मछली पानी में रहती है उसे जैसे ही बाहर निकाला जाता है वो मर जाती है.इसलिए इसमें किसी भी प्रकार का वध शामिल नहीं होता.

शिवसेना ने भी इस बैन का विरोध किया है. अदालत की और से कहा गया की भले ही मुंबई में जैन समुदाय के लोगो की संख्या सिमित है लेकिन. हर समुदाय की विशेष भावना होती है. वही शिवसेना ने आरोप लगाया है की बीजेपी 2017 के स्थानीय चुनाव को ध्यान में रखकर जैन समाज के तुष्टिकरण की कोशिश कर रही है. जैन समाज के इस पर्व के दौरान मीट बैन की शुरुआत 1994 में हुई थी उस समय कांग्रेस सत्ता में थी.फिर 10 साल बाद इस दो दिन के बैन को बढ़ाकर चार दिन का कर दिया गया, लेकिन यह कभी लागु नहीं हुआ. वही गुरुवार को बंद के पहले दिन मीट की कई दुकाने खुली हुई थी.