नितीश 2010 के बाद से ही BJP से अलग होना चाहते थे : मोदी

पटना : शुक्रवार को भाजपा के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी ने एक न्यूज चैनल के कार्यक्रम में खुलासा करते हुए कहा कि 2010 के विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद ही नीतीश कुमार भाजपा से अलग हो जाना चाहते थे. दरअसल चुनाव परिणाम के बाद उन्हें इस बात का गुमान हो गया था कि उनकी बदौलत ही एनडीए को बिहार में दोबारा सत्ता मिली है. मोदी ने साफगोई से स्वीकार किया कि गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी समेत भाजपा के सभी नेताओं का भोज रद्द करने के बाद भाजपा ने जदयू का साथ छोड़ने का निर्णय ले लिया था. लेकिन, बिहार के हित के लिए हम इसलिए चुप रह गये कि लालू प्रसाद कहीं दोबारा सत्ता में न आ जाएं.

नीतीश कुमार को गंठबंधन तोड़ने के लिए जिम्मेवार ठहराते हुए सुशील कुमार मोदी ने कहा कि इसका उत्तर उन्हें जनता को देना ही होगा. भाजपा ने जैसा साथ नीतीश कुमार को दिया, वैसा साथ उन्हें कोई और नहीं देगा. उन्होंने सवालिया लहजे में यह कहा कि नीतीश कुमार कोई एक योजना तो बता दें, जो भाजपा के अलग होने के बाद उन्होंने की हो. उनकी सरकार में जो भी काम किया उसका श्रेय पूरी तरह भाजपा कोटे के मंत्रियों को ही जाता है. गंठबंधन टूटने के बाद बिहार में शासन व्यवस्था भी काफी प्रभावित हुर्इ, विकास पूरी तरह से ठप हो गया. नीतीश कुमार ने बिहार की राजनीति दलदल में धकेल दिया. बिहार विकास की दौड़ में काफी पीछे चला गया.

मोदी ने बिहार को दिए गए पैकेज की चर्चा की. उन्होंगे कहा कि बिहार में विकास की गाड़ी जो पटरी पर तेजी से चल रही थी, वह बेपटरी हो गयी है. केवल भाजपा ही बिहार में विकास कर सकती है. मोदी ने भाजपा की सरकार बनने पर उसकी प्राथमिकता की चर्चा भी की. उन्होंने कहा कि कानून- व्यवस्था, बिजली आधारभूत संरचना का विकास, कौशल विकास, शिक्षा व स्वास्थ्य सर्वोच्च होगी. सुशील मोदी ने यह कहा कि हम जब सरकार में थे, तो हम पूरी ईमानदारी से काम कर रहे थे और विपक्ष में रहे, तो भी ईमानदारी से अपना दायित्व निभाया. लालू प्रसाद से गंठबंधन के बाद बिहार में दर का माहौल उत्पन हो गया है. उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भी जानती है कि बिहार के विकास के लिए भाजपा सरकार यहां भी होनी चाहिए.

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