राष्ट्रपति ने भारत को UNSC में स्थायी सदस्यता न दिए जाने पर जताई हैरानी

नई दिल्ली : संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में भारत की स्थायी सदस्यता की मांग लंबे समय से चली आ रही है। इस मामले में अब तक चीन ही रोड़ा बना हुआ था, लेकिन अब फ्रांस के पूर्व राष्य्रपति निकोलस सरकोजी का कहना है कि यह कल्पना करना ही बेतुका है।

विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र अब तक यूएनएससी का स्थायी सदस्य नहीं बना है। सरकोजी ने यहां एक उद्योग निकाय द्वारा आयोजित सम्मेलन में कहा कि भारत जल्द ही विश्व का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश होगा और यह वास्तव में कल्पना करना बेतुका है कि वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का स्थायी सदस्य नहीं है।

हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भारत के पास स्थायी सदस्यता हो। आप एक अरब बारतीयों को नजरअंदाज कैसे कर सकते है। भारत के बारे में कहते हुए सरकोजी ने कहा कि भारत में कुछ तो बेहद विशेष है, जो उनमें उसके लिए गहरा आकर्षण पैदा करता रहता है।

जी20 व डब्ल्यूटीओ जैसे वैश्विक निकायों के ढांचे और कामकाज में सुधार की वकालत करते हुए उन्होने कहा कि भारत और फ्रांस के बीच एक रणनीतिक साझेदारी होनी चाहिए। उन्होने भारत और फ्रांस के बीच चल रहे उस राफेल सौदे का भी जिक्र किया, जो अब तक पूरा नहीं हुआ है।

उन्होंने एक प्रतिबद्धता दी कि फ्रांस में अगले वर्ष होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में उनकी पार्टी या जो भी सत्ता में आयेगा वह फ्रांस के साथ भारत के समझौतों का सम्मान करेगी। सरकोजी ने पीएम नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात की। मोदी ने ट्वीट कर बताया कि फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी से मुलाकात की।

उन्होने दोनों की एक तस्वीर भी साझा की। सरकोजी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मुलाकात की और आतंकवाद की चुनौती व यूएनओ के सुधार पर चर्चा की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने ट्वीट किया कि विदेश मंत्री ने हैदराबाद हाउस में सरकोजी से मुलाकात की। सरकोजी 2007 से 2012 के बीच फ्रांस के राष्ट्रपति थे और उस दौरान दोनों देशों के संबंधों में काफी प्रगाढ़ता आयी।

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