आकाश के बंजारों को आशियाने की ज़रूरत

आज अंतर्राष्ट्रीय प्रवासी पक्षी दिवस है . बारह साल पहले 10 मई 2006 को प्रवासी पक्षियों के संरक्षण के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने इस दिवस को मनाए जाने की घोषणा की थी. यह इसलिए भी जरुरी था, क्योंकि कई देशों की सरहदों को पार कर मीलों का सफर तय करके मेहमान बनकर आने वाले इन परिंदों के आशियानों और भोजन पर लालची मानव ने डाका डालना शुरू कर दिया जो आज भी जारी है. इसमें बदलाव लाए बगैर लक्ष्य हासिल नहीं किए जा सकता है.

आपको जानकारी हैरान कर देगी कि पक्षियों की कुल ज्ञात प्रजातियों 9865 में से 1227 यानी 12.4% प्रजातियां खतरे में हैं, इनमें से भी 192 पक्षी प्रजातियां तो अत्यधिक संकटग्रस्त स्थिति में पहुँच गई है. बर्ड लाइफ़ इंटरनेशनल व रेड डाटा बुक की बातों पर यकीन करें तो पक्षियों की कुल किस्मों में से 19% पक्षी प्रजातियां प्रवासी पक्षियों के अन्तर्गत आती हैं, इनमें 11% प्रजातियां वैश्विक स्तर पर खतरे की सूची में या संभावित खतरे में शामिल की गई है. जबकि 31 प्रजातियां गंभीर खतरे वाली सूची में हैं. हालाँकि दुनियाभर के तमाम संगठन प्रवासी पक्षियों के संरक्षण व संवर्धन के लिए आगे आ रहे हैं , लेकिन ये प्रयास नाकाफी लग रहे हैं .जबकि आकाश के इन बंजारों को हमें अपने खेत-खलिहानों, चरागाहों और तालाबों में पनाह देने के व्यक्तिगत प्रयास करने की जरूरत है. इनके आशियानों के लिए पहले हमें अपने खेत, खलिहान, तालाब बचाने होंगे.

जाहिर है कि जहाँ प्राकृतिक संपदा के खजाने है वहीं यह प्रवासी पक्षी अपना डेरा डालते हैं. ग्रामीण इलाकों की जमीनें, तालाब, चरागाह, खेत-खलिहान यही सब तो आवास होते है हमारे इन प्रवासी पक्षियों के. किन्तु बदलते माहौल ने हमारे ग्रामीणों का परिवेश का स्वरूप भी बदल दिया है. हमारे प्रवासी  पक्षी इन्ही तालाबों के किनारे चरागाहों, व परती भूमि में सैकड़ों मीलों की यात्रा के बाद उतरते थे. लेकिन अब इन बदले हालातों में ये पक्षी अपना पड़ाव कहाँ डाले ?यह बड़ा सवाल बन गया है.

 संसार में पक्षियों की कई प्रजातियां भोजन, प्रजनन, आवास, जलवायु व सुरक्षा के कारण हर वर्ष हजारों मील का रास्ता तय कर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जाती हैं,  यह प्रवास 4-5 महीने का भी हो सकता है. इन प्रवास स्थलों की दूरी 100 मील से लेकर हजारों मील तक हो सकती है. ख़ास बात यह है कि ये पक्षी इतना लम्बा रास्ता तय कर उन्ही स्थानों पर पहुंचते है, जहाँ वह पिछले वर्ष गये थे, यह कार्य पक्षी बिना किसी नक्शे व राडार प्रणाली के करते है. इतनी अधिक दूरी तय कर निश्चित जगहों पर पहुंचना आश्चर्यजनक है.

आज बदलती जलवायु, बढ़ता प्रदूषण, पर्यावरण असंतुलन ने ऐसे हालात पैदा कर दिए हैं, कि मानव की लालची प्रवृत्ति ने इन पक्षियों के आवास नष्ट कर दिए, इनके शिकार और इनकी उड़ान में बाधाएं खड़ी कर दी , नतीजा यह रहा कि अब इनकी प्रजातियां ही खतरे में पड़ी तो विश्व स्तर पर इन सुन्दर पक्षियों के संरक्षण के लिए विश्व प्रवासी पक्षी दिवस मनाने की महत्वपूर्ण मुहिम शुरू की गई. इसे परवान चढ़ाने के लिए हमें व्यक्तिगत प्रयास करने होंगे, तभी इस दिवस की सार्थकता है, अन्यथा आडंबर के अलावा कुछ नहीं है .

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