क्यों हो रही है 7 माह में ही ओली की नेपाली पीएम पद से छुट्टी...

काठमांडू: नेपाल में सरकार गठन को अभी सात महीने ही हुए है कि मधेशी आंदोलन के बाद एक बार फिर से खतरा मंडराने लगा है। नेपाली पीएम के पी शर्मा ओली जिस गठबंधन सरकार के नेतृत्व में पीएम बने थे, उसमें अब भारी उल्ट फेर की नौबत आन पड़ी है। ओली को पीएम पद छोड़ने के लिए नोटिस भेजा जा चुका है।

एक नया गठबंधन दल पूर्ण बहुमत के साथ सामने आया है। पुष्प कमल दहाल प्रचंड की यूनिफाइड कम्यूनिटी पार्टी ऑफ नेपाल इस गठबंध ने में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है। बुधवार को प्रचंड और ओली के बीच मुलाकात हुई। उन्होने ओली को अपने नेतृत्व वाले सरकार में शामिल होने का न्योता दिया।

प्रचंड ने बताया कि नेपालकांग्रेस उन्हें समर्थन देने को तैयार है। इस मीटिंग के बाद से प्रचंड और ओली की पार्टी के बीच खाई गहरी होती दिख रही है। उधर संसद में राष्ट्रपति के अभिभाषण का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद ही सरकार की नीति, प्रोग्राम और बजट को अगले 72 घंटे के भीतर पेश किया जाएगा।

प्रचंड को मधेशियों का भी समर्थन मिल रहा है। बीते वर्ष 20 सितंबर को नेपाल में नए संविधान को स्वीकार किए जाने के बाद से मधेशियों ने ओली के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। दूसरी ओर नेपाली कांग्रेस के चीफ और प्रचंड के बीच भी मुलाकातों का दौर जारी है।

इस दौरान दोनों पार्टी के नेताओं के बीच सहमति बनी है कि देश की राजनीति में स्थिरता लाने के लिए ओली सरकार का जाना ही बेहतर है। ओली का कहना है कि उनकी पार्टी इसका उचित जवाब देगी। ओली ने सत्ता छोड़ने से भी इंकार किया है।

ओली की पार्टी में ही एक ग्रुप ऐसा भी है, जो दबाव बना रहा है कि हाउस को भंग कर फिर से चुनाव कराया जाए. इस दल का कहना है कि जब तक चुनाव न हो जाए तब तक ओली पीएम के पद पर बने रहेंगे. बता दें कि प्रचंड पूर्व में कुछ समय के लिए नेपाल के पीएम रह चुके है और उनकी सोच हमेशा से भारत विरोधी रही है।

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