नेपाली PM परंपराओं को रखेंगे बरकरार, पहली यात्रा भारत की ही करेंगे

काठमांडू : नेपाल में चल रहे गतिरोधों का ठीकरा भारत के माथे फोड़ने के बाद अब नेपाल के प्रधानमंत्री के पी ओली पुरानी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए अपनी पहली यात्रा भारत ही करेंगे। इससे पहले भारत और नेपाल के बीच तनाव चल रहा था और इसी तनाव के कारण नेपाल की नजदीकियाँ चीन से बढ़ती जा रही थी। इससे पहले ऐसी खबरें आई थी कि नेपाल के पीएम अपनी पहली यात्रा के तहत चीन जा रहे है।

लेकिन अब आंदोलन कर रहे मधेशियों की मांगो को पूरा करने के लिए संविधान में संसोधन को मंजूरी मिलने के बाद ही अब वो विदेश यात्रा पर जाएंगे। गुरुवार की सुबह भारत के पीएम नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए न्योते को नेपाल ने स्वीकार कर लिया है। उन्होने स्वंय मोदी को फोन किया।

नेपाली प्रधानमंत्री के मीडिया सलाहकार प्रमोद दहल ने बताया कि भारतीय पीएम ने ओली को भारत आने के लिए आमंत्रित किया है। ओली ने इस आमंत्रण के जवाब में कहा कि वो हालात सामान्य होते ही जल्द भारत का अधिकारिक दौरा करेंगे।

पहले उप प्रधानमंत्री कमल थापा ने कहा था कि ओली नए साल की शुरुआत में चीन यात्रा पर जा रहे है। नेपाल में नए सरकार के गठन के समय से ही मधेशी और सरकार के बीच गतिरोध जारी है, जो धीरे-धीरे उग्र रुप लेता जा रहा है। नेपाल के दक्षिणी क्षेत्र में मधेशियों ने नाकेबंदी कर रखी है, जिससे नेपाल में ईंधन की भारी किल्लत चल रही है और नेपाल इसके लिए भारत को जिम्मेदार मानता है।

ओली ने अक्टूबर में ही पद ग्रहण किया है। इससे पहले हमेशा से नए प्रधानमंत्री की नियुक्ति के बाद उनकी प्रथम यात्रा भारत की होती रही है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री पुष्प कमल दहल 'प्रचंड' ने अपनी विदेश यात्रा के लिए चीन को प्रथम गंतव्य के रूप में चुना था और 2008 के बीजिंग ओलिंपिक खेल में शरीक हुए थे। भारत प्रचंड को ऐसे व्यक्ति के रूप में देखता है, जिसने नेपाल को चीन के करीब ले जाने की शुरुआत की थी।

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