नेपाल में सियासी उथलपुथल तेज़, कभी भी जा सकती है भारत 'विरोधी' पीएम ओली की कुर्सी !

नेपाल में सियासी उथलपुथल तेज़, कभी भी जा सकती है भारत 'विरोधी' पीएम ओली की कुर्सी !

काठमांडू: नेपाल कम्युनिष्ट पार्टी (NCP) के असंतुष्ट नेता रविवार सुबह राष्ट्रपति विद्या भंडारी से मिले. पुष्पकमल दहल (प्रचंड) की अगुवाई में NCP के शीर्ष नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति को पीएम ओपी शर्मा ओली के दल विभाजन अध्यादेश और देश में आपातकाल लागू करने जैसे विवादास्पद निर्णय पर दस्तखत नहीं करने का आग्रह किया.

इसके साथ ही इन नेताओं ने राष्ट्रपति को भरोसा दिलाया कि उनकी मंशा राष्ट्रपति के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की नहीं है, ये पीएम खेमे की तरफ से किया गया दुष्प्रचार है. राष्ट्रपति विद्या भंडारी ने इन असंतुष्ट नेताओं से पार्टी का बंटवारा रोकने के लिए पीएम के इस्तीफे की मांग छोड़ने की बात कही है. सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति ने कहा कि अगर आप लोग ओली को प्रधानमंत्री पद पर निरंतरता देने के लिए सहयोग करते हैं तो पार्टी अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए वो राजी हो सकते हैं. राष्ट्रपति के इस सुझाव को प्रचंड समेत कई नेताओं ने फ़ौरन खारिज करते हुए साफ़ कर दिया कि ओली का पीएम पद से इस्तीफा ही उनका बॉटमलाइन है.

राष्ट्रपति से मिलने के बाद प्रचंड सीधे प्रधानमंत्री निवास पहुंचे, जहां उनकी पीएम ओली से निर्णायक वार्ता होनी थी. इस वार्ता में भी प्रचंड ने पीएम से सोमवार को होने वाली स्थाई समिति की मीटिंग से पहले अपने इस्तीफा देने की बात पर विचार करने के लिए कहा. जवाब में ओली ने पीएम पद से इस्तीफा नहीं देने की अपनी पुरानी बात दोहराई. इस पर प्रचंड ने स्थाई समिति की मीटिंग से कुछ भी फैसला होने की जानकारी चेतावनी स्वरूप देते हुए मीटिंग से बाहर आ गए.

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