कहीं गिरा था माता सती का बायां गाल तो कहीं दोनों घुटने, जानिए नेपाल के शक्तिपीठों के बारे में

आप सभी जानते ही हैं हर साल नवरात्रि का पर्व मनाया जाता है। जी दरअसल ऐसा कहा जाता है माता के नौ स्वरूपों का इन दिनों में पूजन किया जाता है। हालाँकि मातारानी के 52 शक्तिपीठ भी हैं जहाँ माता के अंग, आभूषण गिरे थे। आज हम आपको उन्ही के बारे में बताने जा रहे हैं। आज हम बात करेंगे नेपाल के शक्तिपीठ के बारे में। जी दरअसल नेपाल में पशुपतिनाथ मंदिर से कुछ दूरी पर बागमती नदी के किनारे गुहेश्वरी शक्तिपीठ है।

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कहा जाता है यहां मां सती के दोनों घुटने गिरे थे। जी हाँ और यहां शक्ति के महामाया या महाशिरा रूप की पूजा होती है। इसके अलावा एक आद्या शक्तिपीठ है जो नेपाल में गंडक नदी के पास स्थित है। जी दरअसल ऐसी मान्यता है कि इस स्थान पर माता सती का बायां गाल गिरा था। जी हाँ और यहां माता के गंडकी चंड़ी स्वरूप की पूजा होती है।

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इसी के साथ नेपाल के बिजयापुर गांव में माता सती के दांत गिरे थे, इस वजह से यहाँ दंतकाली शक्तिपीठ स्थित है। जी हाँ और दांत गिरने के कारण इस शक्तिपीठ को दन्तकाली शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। इसी के साथ नेपाल में एक और शक्तिपीठ स्थित है जिसका नाम मिथिला शक्तिपीठ है। कहा जाता है भारत नेपाल सीमा पर माता सती का बायां कंधा गिरा था और यहां माता को देवी उम कहा जाता है। इस तरह से नेपाल में माता रानी के कुल 4 शक्तिपीठ हैं और चारों शक्तिपीठों में हमेशा भीड़ देखने को मिलती है।

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