इंदौर के गोकुलदास अस्पताल की लापरवाही आई सामने, एक दिन में हुई चार मौत

इंदौर के गोकुलदास अस्पताल में लापरवाही का मामला सामने आया है. कोरोना संक्रमण के दौरान येलो श्रेणी के अस्पताल गोकुलदास में गुरुवार को एक ही दिन में चार मरीजों की मौत हो गई. परिवारवालों द्वारा अस्पताल की लापरवाही का एक वीडियो वायरल करने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है. कलेक्टर मनीष सिंह ने तत्काल ही सीएमएचओ डॉ. प्रवीण जड़िया, अपर सीएमएचओ डॉक्टर माधव हसानी, एमवायएच के अधीक्षक डॉ. पीएस ठाकुर, कोविड अस्पताल एमआरटीबी के इंचार्ज डॉ. सलिल भार्गव, चेस्ट डिपार्टमेंट के डॉ.वीपी पांडे की एक टीम को गोकुलदास अस्पताल भेजा है.

हालांकि इसके बाद प्रशासन ने आनन-फानन में अस्पताल को बंद करने का निर्णय लिया है. साथ ही गोकुलदास अस्पताल में भर्ती सभी 14 मरीजों को एमवाय अस्पताल के न्यू टीबी एंड चेस्ट अस्पताल में शिफ्ट करने का निर्णय लिया गया. इन सभी मरीजों को शुक्रवार सुबह गोकुलदास अस्पताल से हटा दिया जाएगा. उसके बाद अस्पताल को बंद कर दिया जाएगा. इस बारें में कलेक्टर मनीष सिंह ने बताया कि इस अस्पताल में तत्काल प्रभाव से नए मरीजों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है. इस अस्पताल की और भी कई शिकायतें मिली हैं, जिनकी जांच की जाएगी.

अक़प्को बता दें की गुरुवार शाम को गोकुलदास अस्पताल का एक वीडियो वायरल हुआ. इस वीडियो में मरीजों के स्वजन अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते दिखाई दे रहे है. वीडियो की शुरुआत में एक महिला रोते हुए कह रही है कि यह देखो गोकुलदास अस्पताल की हालत, एक के बाद एक मौत होती जा रही है. एक अन्य व्यक्ति बता रहा है कि वार्ड में चार मरीज भर्ती थे. आधा घंटे पहले ही बात करके आए हैं, उनमें से तीन की मौत हो गई है. इसके बाद एक अन्य मरीज के स्वजन सामने आते हैं और उन्होंने मौत का कारण अस्पताल में सैनिटाइजेशन करने की जल्दबाजी में मरीजों की देखरेख नहीं करना बताया. एक अन्य व्यक्ति गोविंद प्रजापत ने वीडियो में बताया कि उनके पिता अस्पताल में भर्ती थे. 4.30 बजे वे मिलकर आए. उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने उनकी मौत की जानकारी दी. आधा घंटे में पांच मरीजों की अस्पताल में मौत हो गई है. उन्होंने कहा कि कलेक्टर इस वीडियो को देख रहे हैं तो कृपया कार्रवाई करें. पूरा पैसा देने के बाद भी मरीज की मौत हो रही है. एक अन्य व्यक्ति ने बताया कि यहां मेडिकल दुकान वाले भी अधिक राशि वसूल रहे हैं. ऐसे में सरकारी अस्पतालों में भर्ती कराते तो बेहतर होता.

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