मानसिकता बदलने की जरुरत - जेटली

नई दिल्ली : देश की नीति निर्माताओं की मानसिकता को लेकर हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि कम्पनियों को सब कुछ अपने नियंत्रण में रखने और मनमुताबिक चलाने वाली मानसिकता को बदलने की जरुरत है. जितना संभव हो सके सरकार की भूमिका को कम करने के साथ ही उसके एकाधिकार को समाप्त किया जाना चाहिए. वित्त मंत्री का यह कहना है कि आर्थिक सुधारों के लिए कारोबार को सुगम बनाये जाने को लेकर प्रयास जारी रहेगा, आपको बता दे कि वित्त मंत्री ने यह बातें जन केंद्रित शासन पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में कहीं है.

उन्होंने यह भी कहा है कि यह कभी ना खत्म होने वाली प्रक्रिया है. इसके साथ ही जेटली ने पुलिस और नागरिकों के बीच का रिश्ता भी सुगम बनाने के निर्देश दिए है. राजनीतिक प्रणाली की नियंत्रण में रखने वाली सोच को लेकर उन्होंने यह भी कहा है कि यह सोच अभी पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है.

सरकार को यह प्रयास करना चाहिए कि नागरिकों को बेहतर जीवनस्तर मुहैया करवाया जाए. उन्होंने यह भी कहा है कि इन सब कोशिशों के तहत सरकार की भूमिका को कम किया जाना चाहिए. इसके अंतर्गत रेलवे और विमानन में सरकार ने भूमिका क्रमशः ज्यादा और कम की है. और दोनों ही के नतीजे सामने आ गए है. साथ ही खास बात सामने यह आ रही है कि रेलवे का संचालन ही एक ऐसा क्षेत्र रह गया है, जहाँ निजी क्षेत्र की कोई भूमिका नहीं है.

इसके तहत कई मुख्य घटक सामने आये है जैसे :-

* भूमिकाओं को घटाने के कई तरीके है - जिन वभागों से सरकार का सीधा संपर्क है उसे आसान बनाना होगा. जैसे कि इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करने को लेकर टेक्नोलॉजी से काफी मदद मिली है.

* कर रियायतों को समाप्त किया जाए - सरकार चाहती है कि आने वाले 4 साल में कॉरपोरेट टैक्स को 30 से 25 फीसदी किया जाए. अभी सरकार को टैक्स 22 प्रतिशत ही मिल पाता है.

* योजनाओ का दुरुपयोग रोकने में मदद - जनधन योजना, आधार योजना और मोबाइल का जिक्र करते हुए यह कहा है कि इसके तहत 30 प्रतिशत LPG सब्सिडी बचाई गई है.

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