एनसीआरबी रिपोर्टः देशभर में आपराधिक गतिविधियां बढ़ीं, जानें रिपोर्ट की प्रमुख बातें

एनसीआरबी रिपोर्टः देशभर में आपराधिक गतिविधियां बढ़ीं, जानें रिपोर्ट की प्रमुख बातें
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नई दिल्लीः केंद्रीय गृह मंत्रालय देशभर में हुए अपराध का सलाना रिकॉर्ड रखता है। जिसे वह राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो यानि एनसीआरबी के तहत देश के सामने जारी करता है। एनसीआरबी ने दो साल बाद देश में अपराध के आंकड़ों की रिपोर्ट जारी की है। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने 2017 के अपराध के आंकड़ों पर अपनी बहुप्रतीक्षित रिपोर्ट जारी कर दी है। जिसमें पता चला है कि पिछले साल की तुलना में अपराध दर्ज कराने की दर में 3.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। वहीं 2013 से अब तक बलात्कार के मामलों में कमी आई है।

वहीं देश के खिलाफ होने वाले अपराधों में बढ़ोतरी हुई है। आईपीसी के तहत कुल अपराधों में उत्तर प्रदेश का हिस्सा 10.1 प्रतिशत है। हालांकि एक जनवरी और 31 दिसंबर के बीच तैयार की गई इस रिपोर्ट से पता चला है कि दिल्ली और यूपी की अन्य राज्यों से तुलना नहीं की जा सकती क्योंकि यहां मामले ऑनलाइन दर्ज होने लगे हैं। 2016 की रिपोर्ट में, 2015 की तुलना में कुल मामलों में वृद्धि 2.6 फीसदी थी। 2017 में हत्या के मामलों में 5.9 प्रतिशत की कमी आई है। 2017 में 28,653 लोगों को मारा गया। जबकि 2016 में यह संख्या 30,450 थी। 2017 में अपहरण के मामलों में नौ प्रतिशत की वृद्धि के साथ 95,893 मामले दर्ज हुए।

2016 में यह संख्या 88,008 थी। एनसीआरबी का कहना है कि 2017 की रिपोर्ट में आईपीसी के तहत कई नए अपराध शामिल हुए हैं। जिसमें अपहरण, आपराधिक धमकी, छोटी-मोटी चोट लगाना, क्रेडिट/ डेबिट कार्ड धोखाधड़ी, लापता बच्चों जिनके अपहरण की आशंका हो, अपहरण और भीख मंगवाने के लिए किया गया अपहरण, आदि शामिल हैं। 2017 में बलात्कार के 32,599 मामले दर्ज किए गए। जिसमें बच्ची/बच्चे की संख्या 10,221 थी। यह 2013 की तुलना में काफी कम है।

2013 में 33,707 मामले दर्ज हुए थे। 2017 में महिलाओं के खिलाफ अपराधों के लिए सजा की दर 24.5 प्रतिशत रहा। दिल्ली में यह दर 35 फीसदी रही। जबकि गुजरात और पश्चिम बंगाल इस मामले में सबसे खराब रहे। यहां सजा की दर 3.1 और 3.2 प्रतिशत रही। महिलाओं के खिलाफ अपराधों के मामलों में 2015 के मुकाबले 2016 में 2.9 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। बता दें कि इस रिपोर्ट को जारी करने में हुई देरी को लेकर सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर थी। हालांकि अब भी सरकार पर महत्वपूर्ण आंकड़े छिपाने के आरोप लग रहे हैं।

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