नवरात्रि के दूसरे दिन करें माँ ब्रह्मचारिणी का पूजन, जानिए स्वरूप

नवरात्रि का पर्व आज से यानी 17 अक्टूबर से शुरू हो गया है। ऐसे में कल यानी 18 अक्टूबर को नवरात्रि का दूसरा दिन है। आप जानते ही होंगे दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है। आप सभी को बता दें कि ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण करने वाली। जी दरअसल ऐसा होने से ब्रह्मचारिणी का अर्थ होता है तप का आचरण करने वाली। आप सभी को बता दें कि नवरात्रि में दुर्गा पूजा के नौ रूपों की पूजा-उपासना की जाती है और उन्ही में ब्रह्मचारिणी भी शामिल है। कहा जाता है मां ने भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी और इस कठिन तपस्या के कारण ही देवी को तपश्चारिणी अर्थात् ब्रह्मचारिणी नाम दिया गया था।

आइए आज हम आपको बताते हैं कैसा है मां दुर्गा का दूसरा स्वरूप देवी ब्रह्मचारिणी- कहा जाता है यह स्वरूप पूर्ण रूप से ज्योतिर्मय है। जी दरअसल मां ब्रह्मचारिणी सदैव शांत और संसार से विरक्त होकर तपस्या में लीन रहती हैं। इसी के साथ कठोर तप के कारण इनके मुख पर अद्भूद तेज और आभामंडल विद्यमान रहता है। कहा जाता है मां के हाथों अक्ष माला और कमंडल होता है और मां को साक्षात ब्रह्म का स्वरूप माना जाता है। इसी के साथ माँ को तपस्या की प्रतिमूर्ति भी कहते हैं।

जी दरअसल मां ब्रह्मचारिणी के स्वरूप की उपासना कर सहज की सिद्धि प्राप्ति होती है। जो माँ का पूजन करता है वह सहजता को प्राप्त करता है इसके अलावा उसके मनोरथ पूरे हो जाते हैं।

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