एक बार फिर 'सिद्धू' के दबाव में कांग्रेस, पंजाब चुनाव से पहले उलझा पेंच

लखनऊ: पंजाब में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले राज्य के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार और पार्टी  प्रदेश इकाई के अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के बीच तनातनी जारी है। सिद्धू पहले भी खुद को सीएम पद का उम्मीदवार घोषित करवाने के लिए पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाते रहे हैं। अब वह पार्टी के प्रत्याशियों के चुनाव और टिकट के बँटवारे में भी अपना दबदबा रखना चाह रहे हैं।
माना जा रहा है कि, सिद्धू किसी भी कीमत पर खुद को पंजाब का CM फेस घोषित करवाना चाह रह रहे हैंं और इसके लिए वह सार्वजनिक मंचों से अपने बयानों के माध्यम से हाई कमान पर दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं।

वे पहले भी कह चुके हैं कि बिना दुल्हे का बारात कैस होगी? हाईकमान को सीएम फेस के नाम का ऐलान करना चाहिए। दरअसल, कांग्रेस ने चन्नी को ही राज्य में CM फेस घोषित किया है, मगर चन्नी विरोध में शुरू से खड़े सिद्धू को यह बात पच नहीं रही है। कुछ दिन पहले एक प्रेस वार्ता में सिद्धू ने कहा था कि कांग्रेस का CM हाईकमान नहीं, जनता तय करेगी। पार्टी सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि सिद्धू के बयानों से परेशान कांग्रेस हाईकमान चुनावों के कारण चुप है, क्योंकि कार्रवाई के लिए अभी वक़्त नहीं है। पार्टी अभी अपना पूरा ध्यान चुनावों पर केंद्रित करना चाहती है। सूत्रों का कहना है कि सिद्धू टिकट बँटवारे को लेकर भी नाराज़ हैं। इसी वजह से वह दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं। हालाँकि, पार्टी नेतृत्व उनसे चर्चा करने के मूड में नहीं है। 

इससे पहले सिद्धू ने यहाँ तक धमकी दे डाली थी कि या तो पंजाब का मौजूदा सिस्टम नहीं रहेगा या वो नहीं रहेंगे। उन्होंने कहा था कि, 'वह उस व्यवस्था को ध्वस्त करने के लिए कार्य कर रहे हैं, जो हमारे गुरु को इंसाफ नहीं दे सकी और ड्रग गिरोह में शामिल बड़ी मछलियों को सजा नहीं दे सकी।' इसी बीच खबर आ रही है कि कांग्रेस ने पंजाब चुनावों के लिए 70 प्रत्याशियों की लिस्ट तैयार कर ली है। वर्तमान विधायकों और मंत्रियों को अपनी-अपनी सीटों से लड़ने के निर्देश दिए गए हैं। वहीं, चन्नी, सिद्धू और बलराम जाखड़ की बीच सीटों को लेकर तनातनी जारी है। इन सीटों पर नामों का ऐलान रोक दिया गया है। माना जा रहा है कि आज कांग्रेस किसी भी समय उम्मीदवारों का ऐलान कर सकती है। हालाँकि, सिद्धू इन नामों से संतुष्ट नहीं लग रहे हैं। वे टिकट बँटवारे में अपना दखल चाह रहे थे। अब देखना ये होगा कि क्या सिद्धू एक बार फिर हाई कमान पर दबाव डालकर अपनी बात मनवा पाते हैं, जैसा कि वो पहले भी कर चुके हैं। 

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