राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना से जुड़े तथ्य

गंगा एक्शन प्लान (GAP)” प्रथम चरण- जिसे 100% केंद्र पोषित योजना के रूप में शुरू किया गया था, और जिसका मुख्य उद्देश्य गंगा नदी के प्रदूषण को रोकना व उसके पानी की गुणवत्ता में सुधार करना था| यह योजना 1985 में शुरू की गई थी| नदी की सफाई के कार्यक्रम को दो अलग-अलग योजनाओं, गंगा एक्शन प्लान GAP द्वितीय चरण तथा राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP) के तहत देश की अन्य प्रमुख नदियों के लिए बढ़ा दिया गया था। यमुना और गोमती कार्य योजनाओं को गंगा एक्शन प्लान-द्वितीय चरण के तहत अप्रैल 1993 में अनुमोदित किया गया।

गंगा एक्शन प्लान प्रथम चरण के तहत, प्रदूषण नियंत्रण कार्य को उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में प्रथम वर्ग के 21 कस्बों में पहुंचाया गया. इस चरण को 451.70 करोड़ रुपए की लागत से 31 मार्च 2000 को सम्पूर्ण घोषित किया गया है।

राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA):
अतीत से सबक पाकर, भारत सरकार (GOI ) ने 2009 में राष्ट्रीय गंगा नदी बेसिन प्राधिकरण (NGRBA) की स्थापना कर इसके नेतृत्व में गंगा की सफाई और संरक्षण के लिए एक नई और अधिक व्यापक दृष्टि विकसित की है | NGRBA ने गंगा में प्रदूषण नियंत्रण सुनिश्चित करने के लिए बहु-क्षेत्रीय कार्यक्रम ("NGRBA कार्यक्रम") विकसित करने के लिए जनादेश दिया है।

NGRBA को केंद्र और राज्य सरकारों की एक सहयोगी संस्था के रूप में स्थापित किया गया है। इसका अध्यक्ष प्रधानमंत्री होता है जिसमें पाँच घाटी राज्यों के प्रमुख भारत सरकार के मंत्री व मुख्य मंत्री शामिल होते हैं NGRBA के नौ सदस्य हैं जो नागरिक समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं । प्रत्येक पांच राज्यों ने राज्य गंगा नदी संरक्षण प्राधिकरण (SGRCA ) का गठन समन्वय और राज्य स्तर पर NGRBA कार्यक्रम को लागू करने के लिए किया| पर्यावरण एवं वन (एमओईएफ) के केंद्रीय मंत्रालय को कार्यक्रम के लिए केंद्रक अभिकरण के रूप में नामित किया गया है। NGRBA को 1986 के पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत गठित किया गया है जो कि इसे मजबूत नियामक और नियंत्रण शक्तियां प्रदान करता है|

उद्देश्य:
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना का उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण योजनाओं के कार्यान्वयन के माध्यम से देश की प्रमुख नदियों (जो कि ताज़ा पानी के प्रमुख स्रोत हैं) के पानी की गुणवत्ता में विभिन्न योजनाओ के माध्यम से सुधार करना है | यह योजना, 10 राज्यों की 18 नदियों सहित 46 शहरों में काम कर रही है| “गंगा एक्शन प्लान द्वितीय-चरण” दिसंबर 1996 में NRCP के साथ विलय हो गई| इसी योजना में 2001 में तमिलनाडु के सात अतिरिक्त कस्बों को 575.30 करोड़ रुपये की लागत से शामिल कर लिया गया है|

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