सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ को मांग भेजने की अपील, SC-ST आरक्षण की इस बात के पक्ष में नही सरकार

Dec 03 2019 12:30 PM
सुप्रीम कोर्ट की बड़ी पीठ को मांग भेजने की अपील, SC-ST आरक्षण की इस बात के पक्ष में नही सरकार

सोमवार को केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आरक्षण में क्रीमी लेयर की व्यवस्था के पक्ष में नहीं है. सरकार ने कहा कि क्रीमी लेयर का सिद्धांत एससी, एसटी आरक्षण में लागू नहीं होता. सरकार ने इस मामले में शीर्ष अदालत के पिछले साल के फैसले को पुनर्विचार के लिए सात न्यायाधीशों की बड़ी पीठ के पास भेजने का भी अनुरोध किया.

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मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार की ओर से सोमवार को यह मांग अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने समता आंदोलन समिति की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष रखी. समिति ने एससी, एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर को हटाए जाने की मांग की है.

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आरक्षण के मामले में वेणुगोपाल ने एससी, एसटी को प्रोन्नति में क्रीमी लेयर का सिद्धांत लागू करने का मुद्दा बड़ी पीठ को भेजने की मांग रखी तो याचिकाकर्ता समिति की ओर से पेश वकील गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि एससी, एसटी आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर करने का मुद्दा पहले संविधान पीठ को भेजा गया था और दो बार इस पर फैसला आ चुका है. पहले एम. नागराज केस में और फिर पिछले वर्ष जरनैल सिंह के मामले में पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ एससी एसटी को प्रोन्नति में आरक्षण से क्रीमी लेयर को बाहर करने की बात कह चुकी है. इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि जरनैल सिंह के मामले में दिया गया फैसला पुनर्विचार के लिए सात न्यायाधीशों को भेजा जाना चाहिए. पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले पर दो सप्ताह बाद विचार करने की बात कही.

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