असम : भाजपा शासन की बड़ी कामयाबी, बोडो अलगाववादी के समर्पण से इस विवाद का हुआ अंत

असम : भाजपा शासन की बड़ी कामयाबी, बोडो अलगाववादी के समर्पण से इस विवाद का हुआ अंत

हिंसा की वजह से दशकों से असम परेशान रहा है. लेकिन अब असम में स्थायी शांति की उम्मीदें बढ़ गई है.अलग बोडोलैंड की मांग करने वाले नेशनल डेमोक्रेटिक फेडरेशन आफ बोडोलैंड (एनडीएफबी) के चार गुटों ने हिंसा का रास्ता छोड़ने का फैसला किया है. इस सिलसिले में सोमवार को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी में इन संगठनों के प्रतिनिधि और असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनेवाल समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे.उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार समझौते में अलग बोडोलैंड राज्य की मांग नहीं माना गया है, लेकिन बोडो लोगों को कुछ अधिक राजनीतिक अधिकार व आर्थिक पैकेज दिये जा सकते हैं.

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इस मामले को लेकर गृह मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि असम में स्थायी शांति के लिए बोडो समस्या के स्थायी शांति की कोशिश लंबे समय से जारी थी. इसी सिलसिले में गुरुवार को बोडो अलगाववादी गुटों के 644 कैडर ने असम के मुख्यमंत्री के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था. इससे 15 दिन पहले म्यांमार में रह रहे एक गुट से जुड़े 50 कैडरों ने भारत में आकर हथियारों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था. इससे इस समस्या के अंतिम समाधान की उम्मीद बढ़ गई थी.

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आपकी जानकारी के लिए बता दे कि जिन चार गुटों के साथ सोमवार को समझौता होने वाला है, उनमें रंजन डैमारी, गोविंदा बासुमातरी, धीरेन बारो और बी. साओरैगरा के नेतृत्व वाले गुट शामिल है. बी आओरैगरा ने 2015 में आइके सोंगबीजीत गुट की कमान संभाली थी. आरोप है कि सोंगबीजीत ने दिसंबर 2014 में 70 आदिवासियों की हत्या का आदेश दिया था. जिसके बाद उसे हटा दिया गया था. समझौते के तहत दो दिन पहले जेल में बंद डैमारी को रिहा किया गया था. ये चारों समझौते पर हस्ताक्षर के लिए दिल्ली आ रहे हैं.

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