रविंद्र नाथ टैगोर की भांजी सरला ने पहली बार गाया था राष्ट्रगान

इस वर्ष देश स्वतंत्रता का 75वां वर्षगांठ मना रहा है। आजादी दिवस पर पूरे देशवासियों के मन में उत्साह एवं जश्न का माहौल रहता है। इस वर्ष देश में स्वाधीनता दिवस को ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तौर पर मनाया जा रहा है। भारत का राष्ट्रगान जन गण मन जब भी सुनाई देता है प्रत्येक भारतीय सम्मान में खड़ा हो जाता है। भारत के राष्ट्रगान का अपना एक इतिहास है।

‘जन-मन-गण अधिनायक जय हे’ 27 दिसंबर, 1911 को राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में गाया गया था। इसे नोबेल अवार्ड विनर तथा राष्ट्रगान के रचयिता रविंद्र नाथ टैगोर की भांजी सरला ने पहली बार गाया था। सरला ने स्कूली बच्चों के साथ यह गान बंगाली तथा हिंदी भाषा में किया था। राष्ट्रकवि रविंद्र नाथ टैगोर ने राष्ट्रगान की रचना इसी वर्ष की थी। टैगोर ने पहले राष्ट्रगान को बंगाली में लिखा था तत्पश्चात, सुभाष चंद्र बोस के आग्रह पर आबिद अली ने इसका हिंदी एवं उर्दू में रूपांतरण किया। 24 जनवरी 1950 को स्वतंत्रत भारत की संविधान सभा में इसे राष्ट्रगान घोषित किया गया।

वही राष्ट्रगान घोषित होने से पूर्व जन गण मन को 1945 में फिल्म हमराही में उपयोग किया गया था। 1919 में आंध्र प्रदेश के बेसेंट थियोसॉफिकल कॉलेज में स्वयं रविंद्र नाथ टैगोर ने प्रथम बार इसे गाया था। इसके पश्चात् बेसेंट थियोसॉफिकल कॉलेज कि एडमिनिस्ट्रेशन ने इसे मॉर्निंग प्रेयर बना लिया। स्वतंत्रता के पश्चात् राष्ट्रगान घोषित होने से पहले जन गण मन को देहरादून के द दून स्कूल में अफसर गीत बना दिया गया था।

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