जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के बीच इस तरह हो सकता है संसाधनो का बंटवारा

जम्‍मू कश्‍मीर और लद्दाख के बीच इस तरह हो सकता है संसाधनो का बंटवारा

अब इस तरह के सवाल जम्मू कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटे जाने का बिल पास हो जाने के बाद उठ रहे हैं कि अभी इसको पूरी तरह से काम करने में कितना समय लगेगा. लोकसभा और राज्यसभा में बिल पास हो जाने के बाद अब इस बिल पर राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होंगे और सरकारी गजट नोटिफिकेशन के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी. गजट नोटिफिकेशन के साथ ही जम्मू कश्मीर विधान परिषद को भंग कर दिया जाएगा, इसी के साथ ये समाप्त हो जाएगी. विधान परिषद के माध्यम से जो भी बिल पेंडिंग पड़े थे वो सभी खत्म हो जाएंगे. आइए जानते है पूरी जानकारी विस्तार से 

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प्राप्त जानकारी के अनुसार नोटिफिकेशन जारी होने के 90 दिन में एक या इससे ज्यादा एडवाइजरी कमेटी बनाई जाएगी. ये कमेटी दोनों राज्यों के बीच बिजली, पानी की सप्लाई से जुड़े विभाजन पर फैसला लेगी. कमेटी निगमों की संपत्ति और इन दोनों जगहों पर मौजूदा क्या-क्या चीजें लद्दाख और जम्मू-कश्मीर में जाएंगी इसे भी सुनिश्चित करेगी. जिससे दोनों राज्यों में संतुलन बराबर बना रहे. इस बिल के कुल 58 पन्ने हैं, इन सभी को पढ़ने के बाद अभी ये तय करना बाकी है कि इन दोनों केंद्र शासित राज्यों में फंड का बंटवारा किस-किस आधार पर होगा. इसी के साथ इनकी राजधानी पर फैसला होना बाकी है. आइए देखते हैं अभी जम्मू और लद्दाख में क्या-क्या चीजें बंटनी है.

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आपकी जानकारी के​ लिए बता दे कि कश्मीर और जम्मू डिवीजन विधान के साथ एक अलग केंद्र शासित प्रदेश होंगे, यहां दिल्ली और पुडुचेरी की तरह विधानसभा होगी. जम्मू में 10 जिले हैं. इनके नाम जम्मू, सांबा, रामबन, कठुआ, उधमपुर, डोडा, पुंछ, राजौरी, रियासी, और किश्तवाड़ हैं. जम्मू के पुंछ हवेली, बाग, सुधान्ती, मुजफ्फराबाद, हट्टियां, भिम्बर, कोटली, मीरपुर और हवेली जिले पाकिस्तान के कब्जे में हैं. जम्मू का क्षे‍त्रफल पीर पंजाल की पहाड़ी रेंज में खत्म हो जाता है. इसी पहाड़ी के दूसरी ओर कश्मीर स्थित है. इसके 10 जिले श्रीनगर, बारामूला, शोपियां, गन्दरबल, बांडीपुरा, बड़गाम, कुलगाम, पुलवामा,अनंतनाग, कूपवाड़ा हैं.इन दोनों जगहों पर अलग-अलग कोर्ट नहीं होगी. एक ही हाईकोर्ट होगी. दोनों केंद्रशासित राज्यों में अलग से हाईकोर्ट नहीं बनेगा. बल्कि मौजूदा जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट को ही दोनों का साझा हाईकोर्ट बनाया जाएगा. यहीं पर साझा जज दोनों राज्यों से जुड़े मामलों को सुनेंगे और फैसला सुनाएंगे. हाईकोर्ट पर होने वाले खर्चा और वहां पर रखे जाने वाले स्टाफ की सैलरी को दोनों जगह की जनसंख्या के आधार पर बांटा जाएगा.

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