नागालैंड हिंसा: जानिए क्या है AFSPA ? जिसे हटाने की मांग कर रही राज्य की जनता

नई दिल्ली: नगालैंड के सीएम नेफ्यू रियो ने सोमवार को मोन जिले में सुरक्षाबलों की गोलीबारी से मरने वाले नागरिकों को अंतिम विदाई दी। इस दौरान उन्होंने एक बार पुनः राज्य में आर्म्ड फोर्सेज स्पेशल पावर एक्ट (AFSPA) को हटाने की मांग की। रियो ने कहा कि उग्रवाद पर काबू पाने के लिए यह कानून लागू किया गया था, तो फिर अब तक इसे क्यों वापस नहीं लिया गया। 

बता दें कि रविवार को सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 14 लोगों की मौत के बाद नगालैंड में एक बार फिर से AFSPA कानून हटाए जाने की मांग तेज हो गई है। यह घटना ऐसे वक़्त में हुई है, जब केंद्र सरकार निरंतर नगा विद्रोही गुटों के साथ शांति वार्ता कर रही है। इस बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने पीएम मोदी से भी मुलाकात की है। दरअसल, AFSPA नगालैंड में कई दशकों से लागू है। वर्ष 1958 में संसद ने राज्य में 'AFSPA' लागू किया था।  भारत में संविधान लागू होने के बाद से ही पूर्वोत्तर राज्यों में पनप रहे अलगाववाद, हिंसा और विदेशी आक्रमणों से प्रतिरक्षा के लिए मणिपुर और असम में 1958 में AFSPA लागू किया गया था। सन् 1972 में कुछ बदलावों के बाद असम, मणिपुर, त्रिपुरा, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और नगालैंड समेत पूरे पूर्वोत्तर भारत में लागू किया गया था।

वहीं, नगालैंड सरकार ने मोन जिले में मारे जाने वालों के परिवार को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है। नगालैंड के परिवहन मंत्री पैवंग कोनयक ने रविवार रात को ग्राम समिति के अध्यक्ष को मुआवजे की राशि सौंप दी है। कोनयक ने यह भी बताया कि घायल लोगों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी गई है। 

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