सम्भोग और विकलांगता से जुड़े मिथ्य

सम्भोग और विकलांगता से जुड़े मिथ्य

सम्भोग और विकलांगता के सम्बन्ध में कुछ गलत धारणाएं प्रचलित हैं. कुछ लोग कहते है कि विकलांग लोग सेक्स नहीं कर सकते लेकिन शारीरिक असमर्थताओं से जूझ रहे लोग भी सेक्स करने में सक्षम हो सकते हैं. इस बारे में पहले भी शोधकर्ता जानकारी देते रहे हैं. तो आइए जानते है ऐसे ही कुछ मिथ्य और उसकी सच्चाई के बारे में.

मिथ्य 1: विकलांग लोग सेक्स नहीं कर सकते

विकलांगता के शिकार लोग भी दुसरे लोगों की ही तरह सेक्स कर सकते हैं. उनकी सेक्स की इच्छा भी और लोगों को तरह ही होती है, इच्छा व्यक्त करने का तरीका अलग ज़रूर हो सकता है.

मिथ्य 2: सभी विकलांग लोग वर्जिन होते हैं

शारीरक असमर्थता से जूझ रहे लोग सामान्य लोगों कि तरह सेक्स कर सकते हैं, इसलिए किसी विकलांग व्यक्ति को वर्जिन मान लेना गलत है.

मिथ्य 3: शारीरक रूप से असमर्थ लोगों को प्यार और सेक्स कि ज़रूरत नहीं

सिर्फ शारीरक रूप से पूरी तरह असमर्थ होने का अर्थ ये बिलकुल नहीं कि उस व्यक्ति को सेक्स या प्यार की ज़रूरत ही न हो. उन्हें भी प्यार करने और पाने का उतना ही हक़ है जितना किसी भी और व्यक्ति को.

मिथ्या 4: विकलांग लोग केवल विकलांगों के साथ ही रिश्ता रख सकते हैं

मानव सम्बन्ध हमेशा थोड़े जटिल होते हैं, फिर चाहे वो सम्बन्ध किसी हष्ट पुष्ट व्यक्ति का हो या विकलांग व्यक्ति का. शारीरक असमर्थता का रिश्तों में योगदान से कोई नाता नहीं है. संबंधों का आधार परस्पर आदर और विश्वास और प्यार होता है.

मिथ्य 5: विकलांगों को सेक्स संक्रमित रोग नहीं हो सकता

गलत!. सेक्स संक्रमण का शारीरक असमर्थता से कोई लेना देना नहीं है. सेक्स संक्रमित रोग किसी को भी हो सकते हैं. महत्वपूर्ण है कंडोम इत्यादि की मदद से इस संक्रमण से बचाव.

मिथ्य 6: विकलांगों के सेक्स शिक्षा की ज़रूरत नही

सेक्स शिक्षा सबके लिए ज़रूरी है, अपने आपको सेक्स संक्रमित रोग और अनचाहे गर्भ से बचाने के लिए. सेक्स शिक्षा सेक्स को बढ़ावा नहीं देती, बल्कि इसकी जानकारी इस सन्दर्भ में सही और सुरक्षित निर्णय लेने में सशक्त करने का काम करती है.

मिथ्य 7: विकलांगों को बच्चे नहीं पैदा करने चाहिए

यदि कोई संरचनात्मक जटिलता न हो, तो कोई कारण नहीं कि शारीरिक विकलांगता के चलते बच्चे पैदा न किये जाएं. विकलांग लोग भी अच्छे माता पिता बन सकते हैं. यह संभव है कि उन्हें कुछ अवसरों पर थोड़ी मदद कि ज़रूरत पड़े, लेकिन यह ज़रूरत तो किसी को भी हो सकती है.