मुर्गा ही बनता था

बस एक लड़के की नजर पीछे की सीट
पर बैठी लड़की पर पड़ी

लड़का – पहचाना मुझे

लड़की – नहीं तो

लड़का – अरे हम दोनों एक ही क्लास में पढ़ते थे
लड़की – पढ़ती तो मैं थी

तू तो रोज मुर्गा ही बनता था

हो गयी न चौड़े में बेज्जती…

 

दामाद बहुत काला

काली साड़ी

आँगन बाड़ी

आठवीं मछली

 

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