मुकद्दर भी सो गए

ुशियों की आरज़ू में मुकद्दर भी सो गए,
आँधी चली कुछ ऐसी कि अपने भी खो गए,
क्या खूब था उनका ये अंदाज़-ए-मोहब्बत-
कि प्यार देने आए थे और पलके भिंगोकर चले गए

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