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फिल्म रिव्यु : आपकी अंतरात्मा को झंझोर देगी अलीगढ़

फिल्म रिव्यु : आपकी अंतरात्मा को झंझोर देगी अलीगढ़

कहा जाता है कि किसी फिल्म की कहानी उसकी अंतरात्मा होती है. और कुछ कहानिया तो अंतरात्मा को जंझोड देती है. और ऐसी ही कहानी है हंसल मेहता की फिल्म अलीगढ़.यह फिल्म कई सारे फिल्म फेस्टिवलो में सराही जा चुकी है. फिल्म की कहानी अलीगढ़ मुस्लिम विद्यालय के प्रोफेसर डॉक्टर एस आर सिरस (मनोज बाजपेयी) के इर्द गिर्द घूमती है.जो यूनिवर्सिटी में एकमात्र मराठी पढ़ाने वाले प्रोफेसर है.लेकिन एक घटना उनकी जिंदगी को पूरी तरह बदल देती है. दरअसल एक रात दो रिपोटर्स और 4 प्रोफ़ेसर सिरस के अपार्टमेंट में चुपके से घुस जाते है और कुछ ऐसा रिकॉर्ड कर लेते है जो प्रोफ़ेसर सिरस की दुनिया को पूरी तरह बदल देता है.

दरअसल अपने अपार्टमेटन में सिरस एक मुस्लिम ऑटो वाले के साथ सम्बन्ध बना रहे होते है. इस घटना के बाद प्रोफ़ेसर का मजाक बनाया जाता है. और प्रोफ़ेसर को यूनिवर्सिटी से सस्पेंड कर दिया जाता है. और उस टेप को मिडिया भी रिलीज कर देता है.वही राजकुमार राव एक युवा पत्रकार की भूमिका में है जो प्रोफ़ेसर सिरस की इस कहानी में इंट्रेस्ट लेता है. अभिनय की बात की जाए तो मनोज बाजपेयी ने एक बार फिर साबित कर दिया की वे कितने उम्दा कलाकार है. वही फिल्म की कहानी आपके सामने कई तरह के सवाल खड़े करेगी.

और आप अपने आप को बेबस महसूस करेंगे. फिल्म की कहानी अपूर्व असरानी ने लिखी है. और बता दिया की कहानी ही सबकुछ होती है. वही हंसल मेहता का निर्देशन भी काफी उम्दा है. फिल्म का संगीत भी काफी बेहतरीन है दो गाने लता मंगेशकर ने गाये है. बैकग्राउंड स्कोर भी काफी अच्छा है. अगर आप एक अच्छी फिल्म देखना चाहते है तो जरूर देखे अलीगढ़.