भयानक हादसा: सहारनपुर में देखते ही देखते ख़ाक में मिल गए लोगों के आशियाने

सहारनपुर: यहां एक तरफ भारत में बढ़ती जा रही बीमारियों के साथ आपदाएं लोगों के लिए आज बहुत ही बड़ी परेशानी बन चुकी है, हर दिन कोई न कोई ऐसी घटना की खबर सामने आ ही जाती है जो रूह को अंदर तक हिला देती है, वहीं हर दिन इन बड़ी बड़ी घटनाओं का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है, जिसके बाद से आम जनता में इस बात का खौफ अब और भी बढ़ चुका है और कई लोगों का कहना है कि क्या आज के समय में अपने घरों में रहना सुरक्षित है भी या नहीं. कुछ ही देर में सारे अरमान जल कर आंखों के सामने खाक हो गए. लोग चीखते रहे, रुदन करते रहे और आग तांडव मचाती रही. जैसे-तैसे बनाए गए छप्पर के आशियाने जलकर जमींदोज हो गए. मवेशी और पूंजी बचाने की जद्दोजहद होने लगी, पर जान पर बन आई तो लोग भागने लगे. लोगों ने कहा कि अगर फायर ब्रिगेड समय पर आती तो इतना नुकसान न होता. 

सहारनपुर में शिवालिक जंगल से सटे गांव खुवाशपुर के लोगों को अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही देर में उनके आशियाने उजड़ जाएंगे. कहीं से चिंगारी आई और सबकुछ जलाकर राख कर दिया. 600 परिवार बच्चों को लेकर बचने के लिए इधर-उधर भागते रहे. छप्पर की बल्लियों पर सांप की तरह लिपटी लपटें तबाही का मंजर दिखा रही थीं. आस थी कि फायर ब्रिगेड कुछ बचा लेगी, लेकिन वह करीब ढाई घंटे देरी से पहुंची. ग्राम प्रधान रियाजुल चौधरी ने बताया कि उन्होंने आज तक ऐसा मंजर नहीं देखा. बच्चे, बूढ़े, जवाब सब चीखते-चिल्लाते बस दौड़ रहे थे. कुछ लोग अपने परिजनों को तलाश करते हुए भाग रहे थे. पता चला है कि शिवालिक की पहाड़ियों में जंगल में आग लगी हुई है. जंगल से ही चिंगारी उनके गांव तक पहुंची. कितने मवेशी मरे, कितने का नुकसान हुआ, ये आकलन सुबह तक हो पाएगा. कइयों की तो जमा पूंजी ही जल गई.

साहब पीने के पानी के लाले हैं, आग कहां से बुझाएं: जिस गांव में पीने के पानी तक के लाले हैं, जरा सोचिए आग बुझाने के लिए वहां के लोग कहां से पानी लेकर आएंगे. जल संकट और ढाई घंटे देरी से पहुंची फायर ब्रिगेड खुवाशपुर के लोगों के लिए अभिशाप साबित हुई. ग्रामीणों ने पानी के टैंकर बुलाकर आग पर काबू पाने का प्रयास किया, लेकिन उनमें पानी भरने के लिए भी गांव से दो किमी दूर रजबहे पर जाना पड़ रहा था. ऐसे में इतनी भयंकर आग पर काबू पाने की कल्पना भी नहीं की जा सकती. अपनी आंखों के सामने अपने आशियानों और जमा पूंजी जलती देख बिलख रहे ग्रामीणों का कहना था कि गर्मी के मौसम में पीने के पानी तक के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है. गांव में लगे हैंडपंपों में 350 से 400 फीट से पानी निकालना बड़ा मुश्किल है. हैंडपंप पर कई-कई लोग एक साथ लगकर पानी खींचते हैं, तब जाकर पीने के लिए पानी मिल पाता है. पेयजल परियोजनाओं से भी आए दिन पानी की आपूर्ति बाधित रहती है.

जनहानि की सूचना नहीं: तहसीलदार आशुतोष भी राजस्व टीम के साथ मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू कराया. मिर्जापुर थाना पुलिस भी राहत व बचाव कार्य में लगी थी. वहीं एसओ मिर्जापुर विरेशपाल गिरी ने बताया कि अभी तक कोई जनहानि नहीं हुई है. करीब 100 घर जलने का अनुमान लगाया जा रहा है.

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