रमज़ान : मुसलमानों की समझ से परे हुआ एतिकाफ और जुमा अलविदा

रमज़ान के महीने को अलविदा कहने में कुछ ही दिन बचे हुए हैं. रमज़ान बहुत ही पवित्र महीना होता है और इस महीने में न ही मुसलमान झूठ बोलते हैं और ना ही उन्हें किसी अश्लील बात पर ध्यान देते हैं, ना ही उन्हें कोई ऐसा शब्द बोलने की इजाजत दी जाती है. रमज़ान को एक बहुत ही पाक महीना कहा जाता है जिसमे लोग केवल अल्लाह को याद कर सकते हैं और उनपर ही ध्यान देते हैं उनके अलावा कहीं और ध्यान देने की इजाजत नहीं होती हैं. इस बार की बात की जाए तो इस बार दो प्रकार के मुसलमानो के लिए अलग-अलग दिन रमज़ान शुरू हुई हैं. जी हाँ, देवबंदी मुसलमानों व बरेलवी मुसलमानों दोनों के लिए अलग-अलग दिन रमज़ान शुरू हुई है.

दोनों ही मुसलमानो को चांद दिखने को लेकर वहम था, क्योंकि देवबंदी मुस्लिमों का कहना था कि चाँद दिख चुका हैं वहीं बरेलवी मुस्लिमों का कहना था चाँद नहीं दिखा, इस वजह से दोनों ने अलग-अलग दिन से रोजा रखना शुरू किया. अब इस बात को लेकर यह गड़बड़ हो रही हैं कि दोनों अलविदा जुमे व एतिकाफ को सही ढंग से नहीं समझ पा रहे हैं दोनों में इसे लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई हैं. हाल ही में जानकरी देते हुए शहर इमाम मौलाना मौहम्मद राशिद रज़ा ने कहा कि 'पूरे भारत में जहां-जहां मुसलमानों ने 18 मई, जुमे को पहला रोज़ा रखा है वो उसी हिसाब से एतिकाफ शुरू करें यानि 6 जून, बरोज बुध को सूरज डूबने से पहले मस्जिद में एतिकाफ की नीयत से ठहरें' उन्होंने बताया कि इस बार सभी 15 जून, 29 रमज़ान को जुमा अलविदा पढ़ सकते हैं.

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