जन्म जन्मातंर के पाप धोने का योग है मोहिनी एकादशी

वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को भगवान श्री कृष्ण की आराधना का दिन माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत रखकर भगवान श्री कृष्ण का पूजन करने वाले के समस्त पाप नष्ट हो जाते हैं और उसे सहस्त्रों जन्मों के और कई वर्षों की तपस्या के समान पुण्य की प्राप्ति होती है. इस व्रत को करने का विधान भी बड़ा सरल है। इस व्रत को भगवान श्री कृष्ण और श्री हरि विष्णु की आराधना के लिए किया जाता है। भगवान इस एकादशी के व्रत से बहुत प्रसन्न होते हैं।

इस व्रत को करने का महात्म्य भगवान श्री कृष्ण ने युधिष्ठर और अर्जुन को बताया था. ये दोनों पांडवा में से थे। इस व्रत को आसान तरीके से किया जा सकता है. व्रत करने के लिए प्रातः काल उठकर स्नान आदि करने के बाद भगवान श्री कृष्ण का पूजन किया जाता है. भगवान श्रीकृष्ण का पूजन करने के लिए भगवान श्री कृष्ण क फोटो को धूप, दीप, गंध, अक्षत, पुष्प, इत्र आदि समर्पित किया जाए और फिर भगवान श्रीकृष्ण के चित्र या फिर मूर्ति पर माला पहनाऐं।

इसके बाद भगवान के निमित्त दीप लगाऐं. भगवान श्री कृष्ण की आराधना ऊॅं नमो भगवते वासुदेवाय, श्री कृष्णः शरणम् मम् के मंत्र जाप से करें. इसके बाद भगवान श्री कृष्ण के निमित्त कुछ प्रसाद बनाऐं। प्रसाद का भोग लगाकर इसे अपने परिजन के साथ ग्रहण करें। भगवान श्री कृष्ण का ध्यान करते जाऐं। यदि संभव हो तो रात्रि जागरण करें। उल्लेखनीय है कि भगवान श्री हरि विष्णु का एक नाम मोहिनी था।

दरअसल समुद्र मंथन के दौरान मोहिनी रूप धरकर भगवान श्री हरि विष्णु ने अमृत कलश की दानवों से रक्षा की थी। इस दिन अच्छे कार्य करने जैसे अन्न दान करने, लोगों को भोजन करवाने, पौधे रोपने, जल के स्त्रोत निर्मित करवाने आदि करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पवित्र तीर्थों नदियों में स्नान, पूजन, तर्पण से भी पुण्यों की प्राप्ति होती है।

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