वर्षो से चले आ रहे टाटा समूह-साइरस मिस्त्री के विवाद का अब होगा अंत, SC में किया गया ये दावा

टाटा समूह तथा साइरस मिस्त्री के मध्य बीते लगभग 4 वर्षो से कानूनी लड़ाई चल रही थी, जिसका अब अंत होता नजर आ रहा है। बृहस्पतिवार को शापूरजी पालोनजी ग्रुप ने टाटा समूह से अलग होने की योजना सर्वोच्च न्यायालय को सौंप दी है। शापूरजी पालोनजी (SP) समूह तथा टाटा का संबंध लगभग सात दशक पुराना है। साइरस मिस्त्री को 28 अक्टूबर, 2016 को टाटा संस के चेयरमैन पद से हटा दिया गया था।

मिस्त्री परिवार की तरफ से सर्वोच्च न्यायालय में कहा गया है कि टाटा में उनकी भागेदारी का मूल्य 1.75 लाख करोड़ रुपये बैठता है। शापूरजी पालोनजी ग्रुप ने अदालत में दावा किया है कि टाटा संस प्रभावी ढंग से दो-समूहों की कंपनी है, इनमें टाटा समूह में टाटा ट्रस्ट, टाटा परिवार के मेंबर तथा टाटा की कंपनियां सम्मिलित हैं। इनकी टाटा संस में कुल इक्विटी शेयर पूंजी 81.6 फीसदी है। वहीं मिस्त्री परिवार के पास शेष 18.37 प्रतिशत भागेदारी है।

दरअसल, मिस्त्री परिवार की टाटा संस में 18.37 फीसदी भागेदारी है। किन्तु जहां एक तरफ टाटा संस में शापोरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप अपनी भागेदारी बेचना चाहता है, वहीं टाटा ग्रुप भागेदारी क्रय करने के लिए तैयार है। टाटा ग्रुप ने बीते दिनों सर्वोच्च न्यायालय में यह जानकारी दी थी। मिस्त्री परिवार के स्वामित्व वाले शापूरजी पलोनजी (एसपी) समूह ने उच्चतम न्यायालय में बताया कि भागेदारी का मूल्यांकन सभी सूचीबद्ध शेयरों, गैर-सूचीबद्ध शेयरों, ब्रांड, नकदी तथा अचल संपत्तियों के हिसाब से निकाला गया है। टाटा संस में शापूरजी पालोनजी ग्रुप की 18.37 प्रतिशत भागेदारी का मूल्य उसके हिसाब से 1,75,000 करोड़ रुपये बैठता है। 

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