मंत्री ने पेश की मिसाल, बच्चो की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाई

Apr 23 2015 03:41 PM
मंत्री ने पेश की मिसाल, बच्चो की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाई
style="text-align: justify;">मध्यप्रदेश/सागर : जहाँ एक तरफ लोग शादियों में लाखों रूपये खर्च कर देते है, वहीँ दूसरी और पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री गोपाल भार्गव ने अपने इकलौते बेटे अभिषेक व बेटी डॉ. अवन्तिका का विवाह सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाकर लोगो के सामने एक शानदार मिसाल पेश की है. गोपाल भार्गव के इस कदम की हर जगह प्रशंसा हो रही है. बता दे कि बुधवार को गढ़ाकोटा में सामूहिक विवाह सम्मेलन आयोजन किया गया, जिसमे 1350 गरीब कन्याओं का विवाह करवाया गया.

इस मौके पर जोड़ो को आशीर्वाद देने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान भी पहुंचे. शादी के मौके पर शिवराज सिंह चौहान ने घोषणा करते हुए कहा है कि जिन नवदम्पत्तियों के घर शौचालय नहीं है, उन्हें शौचालय निर्मित कराने के लिए 12 हजार रुपए की राशि दी जाएगी. इस मौके पर शिवराज सिंह के अलावा मुख्यमंत्री कैलाश जोशी, भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे, वित्त मंत्री जयन्त मलैया, स्वास्थ्य मंत्री नरोत्तम मिश्रा, जनसंपर्क मंत्री राजेन्द्र शुक्ल, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री कुंवर विजय शाह, कृषि मंत्री गौरीशंकर बिसेन, राजस्व मंत्री रामपाल सिंह, नंदकुमार चौहान, अरविन्द मेमन सहित कई मंत्री, सांसद, विधायक और अफसर मौजूद थे.

अपने बच्चो की शादी सामूहिक विवाह सम्मेलन में करवाने पर भार्गव का कहना है कि यह सामाजिक समरसता के लिए किया गया प्रयास है. भार्गव का कहना है कि चार साल पहले उन्हें किसी आलोचक की एक टिप्पणी खल गई थी, जिसमे उसने कहा था कि गरीब परिवारों की बच्चियों की शादी तो कोई भी करा सकता है. बात तो तब है जब भार्गव अपने बच्चों की शादी भी कराएं. आलोचना की इसी चुभन ने भार्गव को इस फैसले तक पहुंचाया. बता दे कि भार्गव पिछले 14 साल से गरीब परिवारों की बच्चियों की शादी करवा रहे है.

भार्गव के इस कदम की मुख्यमंत्री ने भी जमकर तारीफ की है. शिवराज का कहना है कि आज हर माँ बाप चाहते है कि उनके बच्चो की शादी धूमधाम से हो, लेकिन रिष्ठ मंत्री भार्गव ने अपने इकलौते पुत्र व पुत्री का विवाह इस सम्मेलन में समाज की गरीब बेटियों के साथ कराने का जो निर्णय लिया, उसकी मैं प्रशंसा करता हूं. इसके बाद शिवराज सिंह ने भार्गव के पास पहुंचकर उन्हें माला पहनाकर सम्मानित किया.