असहिष्णुता पैदा कर सरकार को किया जा रहा है बदनाम

नई दिल्ली : भारतीय जनता पार्टी की सांसद मीनाक्षी लेखी ने आज लोकसभा में असहिष्णुता पर अपना उद्बोधन दिया। जिसमें उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगा दी थी। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम अभिव्यक्ति की आजादी पर रोक लगाने वाले होते हैं। उन्होंने कहा कि फिल्मकारों और तथाकथित बुद्धिजीवियों द्वारा असहिष्णुता का हवाला देते हुए साहित्यकारों और अन्य लोगों ने अवार्ड लौटाए।

मीनाक्षी लेखी ने कहा कि देश में ऐसे कई लोग हैं जो वर्तमान हालातों की चिंता करते हैं। वे देश को एक अच्छी स्थिति में देखने की कोशिश कर रहे हैं मगर इस तरह के अवार्ड उन्होंने नहीं लौटाए हैं जिन लोगों द्वारा अवार्ड वापस किए गए वे अप्रत्यक्षतौर पर यह बता रहे हैं कि राजनीतिक हित के कारण ऐसा किया गया है। 

केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह पर आरोप लगाने पर मीनाक्षी लेखी ने कहा कि सदस्य और संबंधित पत्रकारों के विरूद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस लाया जाए। किरीट सोमैया द्वारा यह भी कहा गया कि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्यों को नोटिस दिए बिना बयान नहीं देना चाहिए था। यदि उन्होंने बयान दे दिया है तो उन्हें माफी मांगनी होगी। भारतीय जनता पार्टी के हुकुम सिंह द्वारा इस मसले पर माकपा सदस्य और पत्रकार के विरूद्ध विशेषाधिकार हनन का नोटिस दे दिया है।

सांसद मीनाक्षी लेखी द्वारा आरोप लगाया गया है कि 18 माह पूर्व सत्ता से बाहर किए गए नेता नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के विरूद्ध असहिष्णुता का रूख अपनाए हुए है। इस मामले में उन्होंने कहा कि देश में असहिष्णुता नहीं बढ़ी है। यह तो पैदा की जा रही है। असहिष्णुता बढ़ाकर आरोप सरकार पर मढ़ने का प्रयत्न किया जा रहा है।  

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -