पुस्तकों से हटा 'आज़ाद कश्मीर' का जिक्र, इंडिया बनाम भारत विवाद पर NCERT ने दिया ये जवाब

पुस्तकों से हटा 'आज़ाद कश्मीर' का जिक्र, इंडिया बनाम भारत विवाद पर NCERT ने दिया ये जवाब
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नई दिल्ली: नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन रिसर्च एंड ट्रेनिंग (NCERT) ने पाठ्यक्रम में कई संशोधन किए हैं। 12वीं कक्षा की राजनीतिक विज्ञान (Political Science) की पुस्तक में कई चीजों को हटाया और कई चीज़ों को शामिल किया गया है। अयोध्या की 'बाबरी मस्जिद' को 'तीन गुबंद ढांचा' लिखा गया है, आजाद पाकिस्तान शब्द को पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर (PoJK) से बदल दिया गया है, जम्मू और कश्मीर में अनुच्छेद 370 को हटाए जाने का भी उल्लेख किया गया है।

बता दें कि, पाकिस्तान अपने कब्जे वाले कश्मीर को आज़ाद कश्मीर और भारत के हिस्से वाले कश्मीर को गुलाम कश्मीर पढ़ाता है, मजे की बात तो ये है कि, आज तक भारत भी उस हिस्से को आज़ाद कश्मीर ही पढ़ाता था, जबकि ये सर्वविदित तथ्य है कि महाराज हरिसिंह द्वारा भारत में बिना कोई शर्त के विलय करने के बाद पाकिस्तानी सेना ने कश्मीर पर हमला कर दिया था और उसका एक बड़ा हिस्सा कब्जा लिया था। जब भारतीय सेना अपना हिस्सा वापस कब्जाने के लिए बढ़ रही थी, तो तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने संघर्षविराम का ऐलान कर दिया और वो हिस्सा पाकिस्तान के पास ही रह गया, जिसे भारत में आज़ाद कश्मीर पढ़ाया जाने लगा। शायद, यही कारण रहा कि, अरुंधति रॉय, रोमिला थापर, जैसे इतिहासकार कश्मीर को भारत का हिस्सा मानने से ही परहेज करते हैं, बिलकुल यही दावा कश्मीरी आतंकी और कुछ राजनेता भी करते हैं।    

अब मौजूदा सरकार, उस हिस्से को वापस लाने के प्रयास कर रही है, खुद PoK से भी पाकिस्तान सरकार के विरोध में आवाज़ें उठ रहीं हैं। कई जानकारों का मानना है कि, मोदी सरकार के इस कार्यकाल में कश्मीर का वो हिस्सा वापस आने की पूरी संभावना है। वहीं, NCERT ने 'इंडिया बनाम भारत' विवाद पर कहा है कि वे दोनों शब्दों को इस्तेमाल करेंगे। NCERT प्रमुख दिनेश प्रसाद सकलानी ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया है कि 'भारत बनाम इंडिया' इन शब्दों पर बहस करना व्यर्थ है, क्योंकि संविधान में दोनों का जिक्र है। उन्होंने कहा कि NCERT को अपनी नई पुस्तकों में ‘भारत’ या ‘इंडिया’ का इस्तेमाल करने से कोई आपत्ति नहीं है।

एक साक्षात्कार में सकलानी ने बताया कि अपनी किताबों में हम भारत और इंडिया दोनों शब्द किताबों में रखेंगे। जो संविधान कहेगा, हम उसी का पालन करेंगे। भारत और इंडिया शब्द इंटरचेंजिएबली तरीके (कभी भारत तो कभी इंडिया) से प्रयोग किया जाएगा। हमें दोनों शब्दों से किसी तरह की आपत्ति नहीं है। हम ये नहीं करेंगे कि या तो इंडिया लिखें या भारत, हमारे लिए दोनों नाम देश के हैं। 

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