यादो ने सोने न दिया

By Rahul Savner
Sep 20 2015 12:00 AM
यादो ने सोने न दिया

वो नादानी उसकी थी ।

वो शरारत उसकी थी ।

वो कशिश उसकी थी ।

वो अदा उसकी थी ।

में उसके लिए सजा कैसे मांगता ।

वो जुर्म भी उसका था वो अदालत भी उसकी थी ।

ज़माने ने गम दिया, गम ने हसने न दिया ।

लोगो ने रोने न दिया, हताश हो कर तारो से पनाह मांगी ।

नींद आई तो तेरी यादो ने सोने न दिया ।