मेहनत किसान की

आखिर हम कैसे भूल गये, मेहनत किसान की,
दिन हो या रात उसने, परिश्रम तमाम की।

जाड़े की मौसम वो, ठंड से लड़े, 
तब जाके भरते, देश में फसल के घड़े।

गर्मी की तेज धूप से, पैर उसका जले, 
मेहनत से उनकी देश में, भुखमरी टले।

बरसात के मौसम में, न है भीगने का डर, 
कंधों पर रखकर फावड़ा, चल दिये खेत पर।

मेहनत किसान की, कैसे भूल वो रहे, 
कर्ज़, ग़रीबी, भुखमरी से, तंग हो किसान मरे।

दूसरों का पेट भर, अपनी जान तो दी, 
आखिर हम कैसे भूल गये , मेहनत किसान की।

- Sponsored Advert -

Most Popular

- Sponsored Advert -