जासूसी के रैकेट में सामने आ रहे कुछ आश्चर्यजन तथ्य

नई दिल्ली : भारत में मौजूद पाकिस्तान उच्चायोग के अधिकारियों द्वारा जासूसी करने के आरोप लगने के बाद इस मामले की जांच की जा रही है। जांच में महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। दरअसल भारत द्वारा निष्कासित पाकिस्तानी उच्चायोग के कर्मचारी महमूद अख्तर से पूछताछ की गई। पूछताछ में बड़ा खुलासा हुआ। दरअसल दिल्ली पुलिस और खुफिया एजेंसियों ने जो जांच की उसमें यह बात सामने आई है कि दिल्ली में पाकिस्तान के उच्चायोग के 16 अन्य कर्मचारी भी जासूसी के मामले में लिप्त हैं।

इस बात की जानकारी जांच करने वाली एजेंसियों को महमूद अख्तर द्वारा दी गई है। जांच एजेंसियों को लेकर जो जानकारी सामने आई है उसके अनुसार महमूद ने बताया है कि सीमा सुरक्षा बल की जानकारी जुटाने के लिए उच्चायोग के कर्मचारी अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों से जुड़ गए थे और इनके द्वारा जानकारियां जुटाई जा रही थीं। महमूद ने कहा कि जानकारी हासिल करने के लिए इन लोगों को पैसे पहुंचाए जाते थे।

अब जांच एजेंसियां महमूद के दावों की जांच में लग गई हैं। जासूसी का रैकेट सामने आने के बाद महमूद को पकड़ा नहीं गया था। मगर उसे 48 घंटे में भारत से जाने के लिए कह दिया गया था। इस मामले में लोगों की धरपकड़ हुई है इतना ही नहीं पकड़े गए आरोपियों में एक व्यक्ति तो सांसद के सचिव के तौर पर काम करत था। इससे पूछताछ की जा रही है।

अपराध शाखा ने राजस्थान के क्षेत्र के विभिन्न इलाकों में छापेमारी की अब इस मामले में लोगों की तलाश की जा रही है। माना जा रहा है कि जो आरोपी जासूसी में लगे थे उनका कुछ सेवानिवृत्त अधिकारियों से जुड़ाव था। पाकिस्तानी जासूसों के मौलाना रमजान व सुभाष जहांगीर को इसी मामले में पकड़ लिया गया था। पुलिस इनसे पूछताछ कर जानकारियां जुटाने में लगी रही। इन आरोपियों के पास कई कीमती नक्शे, दस्तावेज और जानकारियां मिली हैं। इतना ही नहीं इनके पास कुछ वीज़ा भी बरामद हुए हैं।

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